झारखंड राज्यसभा चुनाव: NDA-INDIA उम्मीदवार जीते, बैजनाथ राम और परिमल नाथवाणी पहुंचे संसद

RANCHI

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवाणी विजयी घोषित किए गए हैं। वहीं कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। नतीजों के साथ ही दोनों प्रमुख गठबंधनों ने एक-एक सीट अपने खाते में दर्ज कर ली।

राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को विधानसभा परिसर में मतदान कराया गया, जिसमें सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत सत्ता और विपक्ष के सभी प्रमुख नेताओं ने वोट डाले। दिन का अंतिम वोट झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने डाला। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद देर शाम मतगणना हुई और परिणामों की घोषणा कर दी गई।

नतीजों से पहले ही जीत का दावा कर रहे थे उम्मीदवार

मतदान के बाद से ही दोनों प्रमुख उम्मीदवार अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे थे। विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए बैजनाथ राम ने दावा किया था कि उन्हें पर्याप्त समर्थन प्राप्त है और उनकी जीत तय है। उन्होंने कहा था कि इंडिया गठबंधन के पास आवश्यक संख्या बल मौजूद है और गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों को पर्याप्त वोट मिलेंगे। हालांकि अंतिम परिणाम में केवल बैजनाथ राम ही जीत दर्ज कर सके।

दूसरी ओर, उद्योग जगत से जुड़े और एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने भी अपनी जीत का भरोसा जताया था। विधानसभा में संख्या बल को लेकर अलग-अलग दावों के बीच चुनावी मुकाबला दिलचस्प बना रहा, लेकिन आखिरकार नाथवाणी ने जीत हासिल कर एनडीए के लिए एक सीट सुरक्षित कर ली।

विधानसभा के संख्या समीकरण पर टिकी थीं निगाहें

इस चुनाव पर राजनीतिक गलियारों की खास नजर थी क्योंकि झारखंड विधानसभा में गठबंधन की स्थिति और विधायकों के समर्थन को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। मतदान से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष में संख्या बल होने का दावा कर रहे थे। नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन अंततः बैजनाथ राम और परिमल नाथवाणी संसद के उच्च सदन में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे।

चुनाव परिणाम के बाद दोनों विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम झारखंड की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर और विधानसभा के शक्ति संतुलन को भी दर्शाता है।

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