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बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा घोटाला सामने आने के बाद बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने कड़ा फैसला लिया है। आयोग ने पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया है। साथ ही परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी साई एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। आयोग ने कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उसकी बैंक गारंटी भी जब्त कर ली है।
यह परीक्षा 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच बिहार के अलग-अलग जिलों में कई चरणों में आयोजित की गई थी। जांच में सामने आया कि एजेंसी ने आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हुए अधिकृत कर्मचारियों की जगह अपने कर्मचारियों को परीक्षा केंद्रों पर तैनात किया। इसके बाद कई जिलों से नकल और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं।
11 लाख अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन
AEDO भर्ती को लेकर युवाओं में भारी उत्साह था क्योंकि बिहार शिक्षा विभाग में इस पद के लिए पहली बार भर्ती निकाली गई थी। कुल 935 पदों के लिए करीब 11 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए BPSC ने परीक्षा को तीन चरणों में आयोजित किया था। राज्य के सभी 38 जिलों में 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। लेकिन परीक्षा शुरू होते ही कई जगहों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने लगी।
मुंगेर, नालंदा, समस्तीपुर समेत कई जिलों में अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतों और जांच के बाद आयोग ने परीक्षा की सभी नौ पालियों को रद्द करने का फैसला लिया।
व्हाट्सएप ग्रुप से भेजे जा रहे थे जवाब
जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा के दौरान एक बड़ा संगठित नकल गिरोह सक्रिय था। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों और असामाजिक तत्वों ने मिलकर परीक्षा केंद्रों के अंदर नकल कराने की पूरी व्यवस्था की थी।
बताया गया कि बायोमेट्रिक ऑपरेटरों और सुपरवाइजरों की मदद से उम्मीदवारों तक जवाब पहुंचाए जा रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि प्रश्न पत्र की तस्वीरें खींचकर उनके उत्तर व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भेजे जा रहे थे।
मुंगेर में पुलिस छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एडमिट कार्ड और हस्तलिखित नोट्स भी बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क को “मास्टर” नाम का एक शख्स संचालित कर रहा था, जो फिलहाल फरार है।
36 गिरफ्तार, 32 अभ्यर्थियों पर बैन
परीक्षा के पहले चरण से कुछ घंटे पहले मुंगेर प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर सुजल कुमार नामक संदिग्ध को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर कई अहम जानकारियां दीं।
अब तक इस मामले में 36 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि छह जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं BPSC ने इस घोटाले में शामिल 32 अभ्यर्थियों को भविष्य की परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया है।
इस पूरे मामले ने बिहार की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब अभ्यर्थियों की नजर इस बात पर है कि दोबारा परीक्षा कब आयोजित की जाएगी।
