नागपुरी सिनेमा की बड़ी पेशकश: ‘बीर, आईज कर बिरसा’ 24 अप्रैल को JD सिनेमा में होगी रिलीज़



RANCHI

रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में बहुप्रतीक्षित नागपुरी फ़िल्म बीर, आईज कर बिरसा’ की आधिकारिक रिलीज़ की घोषणा की गई। फ़िल्म 24 अप्रैल 2026 को जेडी सिनेमा, रांची में प्रदर्शित होगी।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. विजय प्रकाश, जिन्हें झारखंड का “राज कपूर” और राज्य के प्रथम डिजिटल फिल्ममेकर के रूप में भी जाना जाता है, ने कहा कि इस फ़िल्म में पहली बार नागपुरी कला और संस्कृति के इतने बड़े नाम एक साथ नजर आएंगे।

बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान की झलक

उन्होंने बताया कि फ़िल्म में पद्मश्री मधु मंसूरी, पद्मश्री मुकुंद नायक, स्वर्गीय राम उचित सिंह ‘राकेश’, मनीष बरवार, रवि कांत, बुटन महली, बिमला देवी और संतोषी तिग्गा जैसे प्रतिष्ठित कलाकार शामिल हैं, जो अलग-अलग भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आते हैं।

इस दृष्टि से ‘बीर’ केवल एक फ़िल्म नहीं, बल्कि झारखंड की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक चेतना का प्रतिनिधि प्रयास है। फ़िल्म के टिकट BookMyShow पर उपलब्ध हैं।

मजबूत कलाकार सूची और तकनीकी पक्ष

फ़िल्म की कास्ट में विजय प्रकाश, चांदनी बड़ाइक, मजबूल खान, अनिल सिकदार, मनीष बरवार, दीपक चौधरी, शशिकला पौराणिक, राजीव सिन्हा, राकेश चंद्र गुप्ता, रितेश कुमार, राम बाबू प्रसाद, अंकिता प्रजापति समेत कई कलाकार शामिल हैं।

तकनीकी दृष्टि से भी फ़िल्म को सशक्त बताया गया है। इसका संगीत श्रीकांत इंदवार ने दिया है, जबकि गीत मनीष बरवार द्वारा लिखे गए हैं। गीतों को मुकुंद नायक, मधु मंसूरी, मोनिका मुंडू, पवन राय, मनोज सहरी और ज्योति साहू सहित कई गायकों ने स्वर दिया है।

झारखंड की मिट्टी और इतिहास से जुड़ी फिल्म

फ़िल्म की शूटिंग रांची और आसपास के कई महत्वपूर्ण स्थलों—बिरसा मुंडा म्यूज़ियम एंड मेमोरियल पार्क, गेटलसूद, खुखरागढ़ चट्टी और जगन्नाथपुर मंदिर—में की गई है, जिससे इसकी कहानी झारखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ती है।

फ़िल्म के प्रस्तुतकर्ता एस. एन. प्रसाद ने इसे झारखंड सिनेमा के लिए एक लैंडमार्क बताया, वहीं जेडी सिनेमा के जनरल मैनेजर ध्रुव कुशवाहा ने उम्मीद जताई कि यह फ़िल्म दर्शकों को खूब पसंद आएगी।

प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद नागपुरी सिनेमा लगातार आगे बढ़ रहा है, और ‘बीर, आईज कर बिरसा’ उसी प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक ऊर्जा का उदाहरण है।

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