नागपुरी विभाग में शोध की दिशा और संभावनाओं पर चर्चा, रांची विश्वविद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन

बीआईटी मेसरा के प्रो. मृणाल पाठक ने शोध की प्रक्रिया, मानदंड और नवाचार पर दिया मार्गदर्शन

RANCHI

स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची में आज पीएचडी कोर्स वर्क के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बी.आई.टी. मेसरा, राँची के प्रोफेसर मृणाल पाठक उपस्थित हुए।

अपने व्याख्यान में प्रो. पाठक ने शोध की मूलभूत अवधारणा को स्पष्ट करते हुए शोध के विभिन्न चरणों को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने शोधार्थियों को एक सफल शोध कार्य के लिए पाँच प्रमुख आधार बताए – पठन, स्मरण, अनुप्रयोग, विश्लेषण तथा शोध की सुविचारित शुरुआत। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि शोध केवल जानकारी का संकलन नहीं, बल्कि नवाचार और समाजोपयोगी निष्कर्षों की खोज का माध्यम है।

प्रो. पाठक ने शोध विषय के चयन की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विषय ऐसा होना चाहिए, जो प्रासंगिक होने के साथ-साथ समाज के लिए उपयोगी निष्कर्ष प्रस्तुत कर सके। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शोध के आवश्यक मापदंडों पर चर्चा करते हुए शोधार्थियों को तार्किकता, तथ्यपरकता और मौलिकता को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

कार्यक्रम के दौरान शोधार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का उन्होंने संतोषजनक उत्तर देते हुए उन्हें एक जागरूक एवं जिम्मेदार शोधकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उनके विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों में उत्साह एवं नई ऊर्जा का संचार किया।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी, को-ऑर्डिनेटर डॉ. मनोज कच्छप, पीएचडी नामांकन प्रभारी डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो तथा डॉ. रीझु नायक ने संयुक्त रूप से बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक व्याख्यानों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, जिससे शोधार्थियों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलता रहे।

कार्यक्रम में विभाग के सभी शोधार्थीगण एवं स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं की सक्रिय उपस्थिति रही।

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