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अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर लागू होने के साथ ही अमेरिका-इज़राइल के 40 दिनों से जारी हमलों पर फिलहाल रोक लग गई है। इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया था। लगातार हवाई हमले, मिसाइल अटैक और धमकियों के बीच हालात बेहद विस्फोटक हो गए थे।
यह सीज़फ़ायर ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता अपने चरम पर थी और वैश्विक शक्तियां इस टकराव को लेकर गंभीर चिंता जता रही थीं।
अमेरिका मुआवजा देगा, 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा
इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान ईरान को हुए नुकसान की भरपाई करने पर सहमति जताई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें ईरान की प्रमुख मांगों को शामिल किया गया है।
इनमें अमेरिका की ओर से आक्रमण न करने की प्रतिबद्धता, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों की वापसी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ प्रस्तावों को खत्म करना शामिल बताया जा रहा है।
साथ ही, इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि युद्ध के नुकसान की भरपाई होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के जरिए सुनिश्चित की जा सकती है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलेगा, वैश्विक बाजार को राहत
ईरान ने सीज़फ़ायर अवधि के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से शिपिंग फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। यह दुनिया के करीब 20% तेल और गैस सप्लाई का मुख्य रास्ता है।
इस मार्ग के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। ऐसे में इसके खुलने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता, इस्लामाबाद में अगला दौर
इस पूरे समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता अहम रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में उसकी भूमिका निर्णायक बताई जा रही है।
अब इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत होनी है, जहां यह तय होगा कि इस अस्थायी सीज़फ़ायर को स्थायी शांति समझौते में बदला जा सकता है या नहीं।
परमाणु और मिसाइल मुद्दे पर गहरे मतभेद
हालांकि, कई बड़े मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं पर नियंत्रण लगाए, जबकि ईरान ने साफ कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होगा।
ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा, लेकिन प्रतिबंधों में राहत के बदले अपनी परमाणु गतिविधियों पर सीमाएं तय करने को तैयार है।
क्या दो हफ़्ते की शांति टिक पाएगी?
अमेरिका ने यह भी साफ संकेत दिया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो हालात फिर से युद्ध की ओर जा सकते हैं। ऐसे में यह दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर एक परीक्षा की तरह है, जहां कूटनीति और सैन्य रणनीति आमने-सामने हैं।
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस नाजुक समझौते पर टिकी हैं—जहां एक तरफ युद्ध से राहत है, तो दूसरी तरफ एक बड़े टकराव का खतरा अब भी बना हुआ है।
