आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब को असम पुलिस ने किया अरेस्ट, बोकाखाट थाने में दर्ज मामले में कार्रवाई



Guwahati

असम पुलिस ने स्वदेशी अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व निर्दलीय विधानसभा प्रत्याशी प्रणब डोले को रविवार को गुवाहाटी से गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी बोकाखाट थाना में दर्ज एक आपराधिक मामले के सिलसिले में की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बोकाखाट पुलिस की टीम उन्हें अपनी हिरासत में लेने के लिए गुवाहाटी पहुंच रही है।

दिसपुर थाना के अधिकारियों ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि डोले को हिरासत में ले लिया गया है और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें बोकाखाट पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल मामले में इससे अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बोकाखाट थाना में 29 जून को दर्ज मामले में प्रणब डोले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें धारा 61(2), 62, 74, 121, 121(1), 121(2), 132, 190, 191(2), 191(3), 221, 324(2), 326(ग), 329(3) और 351(3) शामिल हैं।

पुलिस ने डोले को गुवाहाटी के सुंदरपुर इलाके में स्थित एक मकान से हिरासत में लिया, जहां वह कथित तौर पर अपने एक मित्र के साथ रह रहे थे।

पुलिस की गाड़ी तक ले जाए जाने के दौरान प्रणब डोले ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना गिरफ्तारी वारंट दिखाए हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा कि बिना किसी वारंट के उन्हें ऐसे ले जाया जा रहा है जैसे किसी का अपहरण किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब शांतिपूर्वक काम करना भी मुश्किल हो गया है।

बोकाखाट पुलिस के गुवाहाटी पहुंचने के बाद डोले को औपचारिक रूप से उनकी हिरासत में सौंपा जाएगा और फिर उन्हें बोकाखाट ले जाया जाएगा।

प्रणब डोले की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने काजीरंगा के हाथीखुली क्षेत्र में इंगले पाथर भूमि विवाद का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया था। वह लंबे समय से इंगले पाथर और हाथीखुली में कथित भूमि आवंटन का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से सटे इन इलाकों की जमीन का वर्गीकरण बदलकर एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी को आवंटित किया गया, जबकि वहां लंबे समय से रहने वाले लोगों और किसानों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में प्रणब डोले ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित पैले दे नेशंस में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के 14वें बिजनेस एंड ह्यूमन राइट्स फोरम में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था।

फिलहाल असम पुलिस ने इस मामले में दर्ज आरोपों के आधार या जांच से जुड़ी अन्य जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

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