अंबा प्रसाद के संघर्ष को मिली मजबूती, मुआवजे की मांग तेज, भूमि अधिग्रहण कानून की उठी जोरदार आवाज

विस्थापितों के हक की लड़ाई तेज

RANCHI

झारखंड में विस्थापितों के अधिकारों को लेकर चल रहा संघर्ष अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद द्वारा छेड़ी गई लड़ाई को अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन मिलने लगा है।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बड़कागांव क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में 2013 के कानून का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे प्रभावित लोगों को उनका उचित हक नहीं मिल पा रहा है।

योगेंद्र साव के मामले पर प्रशासन घिरा

प्रदेश प्रभारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर और फैक्ट्री को सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में बलपूर्वक तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि साव केवल भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा और सुविधाओं की मांग कर रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के कई जिला प्रशासन माइनिंग माफिया के दबाव में काम कर रहे हैं, जिसके कारण कानून का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।

एकजुटता से ही मिलेगा अधिकार

अंबा प्रसाद ने प्रदेश प्रभारी के बयान का स्वागत करते हुए इसे विस्थापितों की लड़ाई में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल बड़कागांव ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के रैयतों के लिए उम्मीद की शुरुआत है।

उन्होंने सभी विस्थापितों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अगर आज भी लोग बिखरे रहे, तो भविष्य संकट में पड़ सकता है। अंबा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को पूरी तरह लागू नहीं किया जाता और प्रभावित लोगों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता।

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