RSF ने झारखंड के पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की तुरंत रिहाई की मांग की

RANCHI

प्रेस की आजादी के लिए काम करने वाली वैश्विक संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने फ्रीलांस पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की तत्काल रिहाई की मांग की है। सिंह पिछले चार साल से जेल में हैं। संस्था ने भारत सरकार से उनके खिलाफ चल रहे सभी पांच मामलों को खत्म करने की भी अपील की है।

RSF के अनुसार, सिंह को जुलाई 2022 में माओवादी विद्रोहियों से कथित संबंधों के आरोप में UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ पांच अलग-अलग मामले चल रहे हैं, जिनमें से दो में उन्हें जमानत मिल चुकी है।

संस्था ने दावा किया कि सिंह को इससे पहले 2019 में भी गिरफ्तार किया गया था। 2022 में दोबारा गिरफ्तारी के बाद उन्हें तीन और मामलों में आरोपी बनाया गया। RSF के मुताबिक, 9 अप्रैल को उन्हें उनके गृहनगर से 350 किलोमीटर से अधिक दूर भागलपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। यह 2022 के बाद उनका पांचवां जेल ट्रांसफर है। संस्था ने उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर भी चिंता जताई है।

RSF ने कहा कि गिरफ्तारी से पहले सिंह ने झारखंड के गिरिडीह जिले में औद्योगिक प्रदूषण के स्वास्थ्य पर असर से जुड़ी रिपोर्टिंग की थी। संस्था के मुताबिक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने भी उनके खिलाफ दर्ज मामलों पर सवाल उठाए हैं।

सिंह की पत्नी इप्सा शतक्षी का मानना ​​है कि इन जांचों के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज़ हो गई थी। RSF ने यह भी बताया कि 2021 में पेगासस स्पाइवेयर से संभावित निगरानी के लक्ष्यों की लीक हुई सूची में अन्य भारतीय पत्रकारों के साथ सिंह का फ़ोन नंबर भी शामिल था।

RSF ने यह भी कहा कि 2021 में पेगासस स्पाइवेयर से संभावित निगरानी के लक्ष्यों की लीक हुई सूची में सिंह का फोन नंबर भी शामिल था। संस्था ने भारत सरकार से उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई, सभी पांच मामलों को खत्म करने, जेल ट्रांसफर रोकने और उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

RSF की एडिटोरियल डायरेक्टर ऐनी बोकांडे ने कहा कि किसी पत्रकार पर आतंकवाद जैसे आरोप लगाकर कई मामले दर्ज करना और उसे परिवार से दूर दूसरी जेल में भेजना पत्रकारिता को हतोत्साहित करता है।

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