नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमिया सुरीन की मौत, उठा सेवा सुरक्षा का मुद्दा; नियमितीकरण की मांग तेज



RANCHI

 झारखंड अस्सिटेंट प्रोफेसर कांट्रेक्ट्चुअल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ ०संजय कुमार झा ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय के डोरंडा कॉलेज के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग (मुंडारी) की नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर 48 वर्षीय डॉ.अमिया सुरीन के असामयिक निधन से झारखंड का उच्च शिक्षा जगत काफी शोकाकुल है। उनके निधन ने एक बार फिर राज्य के लगभग 700 नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों की दयनीय एवं असुरक्षित सेवा-स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर पिछले साढ़े आठ वर्षों से अधिक समय से उच्च शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। इसके बावजूद आज तक उन्हें नियमित सेवा का दर्जा, सेवा सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, भविष्य निधि, पारिवारिक सुरक्षा अथवा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ऐसे में प्रत्येक शिक्षक और उसके परिवार का भविष्य पूरी तरह अनिश्चित बना हुआ है।

डॉ. अमिया सुरीन का निधन केवल एक शिक्षक की मृत्यु नहीं, बल्कि उस असुरक्षा का प्रतीक है, जिसमें वर्षों से सैकड़ों शिक्षक कार्य कर रहे हैं। जब कोई नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर इस दुनिया से चला जाता है, तो उसके साथ उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा भी समाप्त हो जाती है। पीछे छूट जाते हैं छोटे-छोटे बच्चे, माता-पिता और जीवनसाथी, जिनके लिए न कोई पारिवारिक पेंशन है, न बीमा, न अनुकंपा नियुक्ति और न ही किसी प्रकार की स्थायी सरकारी सहायता। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील समाज के लिए चिंता का विषय है।

संघ के सचिव डॉ ब्रह्मानंद साहू  ने कहा कि आर्थिक असुरक्षा, अनिश्चित सेवा, मानसिक तनाव और भविष्य की निरंतर चिंता के बीच वर्षों तक कार्य करना उनके जीवन को अत्यंत कठिन बना देता है। ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई शिक्षक गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, तो उसके सामने उपचार के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण की चिंता भी खड़ी हो जाती है। यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे नीड बेस्ड शिक्षक समुदाय की साझा पीड़ा है।

संघ के कोषाध्यक्ष डॉ० सुमंत कुमार ने राज्य सरकार, महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के नियमितीकरण की दिशा में शीघ्र ठोस निर्णय लिया जाए। नियमितीकरण तक कम-से-कम स्वास्थ्य बीमा, चिकित्सा सहायता, जीवन बीमा, सामाजिक सुरक्षा एवं परिवार को संरक्षण देने वाली योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

संघ के प्रवक्ता हरेंद्र पंडित डॉ० ने कहा कि जो शिक्षक प्रतिदिन हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे हैं, यदि उनका अपना और उनके परिवार का भविष्य ही असुरक्षित रहेगा, तो यह उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

संघ के मीडिया प्रभारी डॉ.बीरेंद्र कुमार महतो ने कहा कि डॉ.अमिया सुरीन अपने पीछे एक सात वर्षीय पुत्री सहित शोकाकुल परिवार छोड़ गई हैं। यह घटना केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि उन सैकड़ों नीड बेस्ड शिक्षकों की वेदना है, जो वर्षों से बिना किसी ठोस सेवा सुरक्षा के राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को संभाले हुए हैं।

संघ के शिक्षक यथा डाॅ०प्रभाकर कुमार,डाॅ०अवन्तिका कुमारी, डॉ.हर्षवर्द्धन , डॉ०संदीप कुमार,डॉ०वासुदेव प्रजापति, डॉ.अजय नाथ साहदेव, डॉ.तेतरु उरांव, डॉ०अन्नपूर्णा झा, डॉ०कंचन गीरि, डॉ०गजनाफर अलि, डॉ०स्मिता कुमारी, डॉ०सोयब अंसारी, डॉ०सुजाता बाला, डॉ०प्रभास गोराई , डॉ.बद्दिजुमान, डॉ.अजीत हांसदा, डॉ.मेराकल टेटे ,डॉ०अराधना तिवारी, डॉ०पुष्पा तिवारी, डॉ०राम कुमार सिंह, डॉ० बिंदेश्वर साहू आदि के साथ साथ सैकड़ों शिक्षक बंधुओं ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और नीड बेस्ड शिक्षकों के जीवन, सम्मान तथा भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *