असम CM हिमंता का बड़ा दावा: बंगाल के बाद झारखंड BJP का अगला लक्ष्य, बोले- यह हमारा अधूरा एजेंडा

NEW DELHI

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने झारखंड की राजनीति को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल के बाद अब झारखंड भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। उन्होंने इसे भाजपा का “अनफिनिश्ड एजेंडा” बताते हुए कहा कि आने वाले समय में पार्टी यहां सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी।

झारखंड में बदलाव और घुसपैठ का मुद्दा उठाया

एक हालिया साक्षात्कार में सरमा ने कहा कि झारखंड की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है और मुर्शिदाबाद के रास्ते घुसपैठ का असर राज्य पर पड़ा है। उनके अनुसार, यही कारण है कि झारखंड को भाजपा की नीतियों और नेतृत्व की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद पार्टी का मनोबल कमजोर नहीं हुआ है और असफलता को उन्होंने सफलता की पहली सीढ़ी बताया। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

कांग्रेस पर साधा निशाना, राहुल गांधी पर लगाए आरोप

साक्षात्कार के दौरान सरमा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी पारंपरिक मध्यमार्गी राजनीति से हटकर वामपंथी और जाति-आधारित विमर्श की ओर बढ़ गई है।

सरमा ने कहा कि अपने 22 वर्षों के कांग्रेस कार्यकाल में उन्होंने कभी जाति-आधारित राजनीति या सड़क आंदोलन की संस्कृति को पार्टी की पहचान के रूप में नहीं देखा था। उनके मुताबिक, वर्तमान कांग्रेस में वैचारिक बदलाव ने नेहरू, सरदार पटेल और गांधी परिवार की पुरानी सोच से जुड़े लोगों को असहज कर दिया है।

असम में ध्रुवीकरण की जरूरत नहीं रही: सरमा

असम की राजनीति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जिन समस्याओं को लेकर ध्रुवीकरण की राजनीति की आवश्यकता महसूस होती थी, उन पर अब काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि अब कानून का पालन बढ़ा है और सामाजिक संतुलन मजबूत हुआ है।

सरमा ने कहा कि मूल निवासी समुदायों, जिनमें असमिया मुसलमान भी शामिल हैं, को यह भरोसा मिला है कि सरकार उनकी चिंताओं को भी गंभीरता से सुनती है। उनके अनुसार, लोगों को अब यह विश्वास हो गया है कि शासन किसी एक वर्ग का नहीं बल्कि सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है।

मणिपुर विवाद पर समुदायों के समाधान की वकालत

मणिपुर में जारी तनाव को लेकर सरमा ने कहा कि यह मूल रूप से समुदायों के बीच का विवाद है और इसका स्थायी समाधान केवल आपसी संवाद से ही निकल सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रख सकती है, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक मतभेदों का समाधान संबंधित समुदायों को स्वयं खोजना होगा।

उनके मुताबिक, बाहरी हस्तक्षेप से ऐसे जटिल विवादों का समाधान संभव नहीं है और सरकार की भूमिका केवल बातचीत को प्रोत्साहित करने तक सीमित रहनी चाहिए।

भाजपा की जीत और सरमा की भूमिका

गौरतलब है कि हालिया राज्य चुनावों में हिमंता बिस्वा सरमा ने भाजपा के प्रचार अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अपने स्पष्ट और विवादित बयानों के लिए चर्चित सरमा ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पूर्वी भारत में भाजपा की राजनीतिक रणनीति का अगला केंद्र झारखंड हो सकता है।

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