परिसीमन: आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा और बढ़ोतरी की मांग, प्रतिनिधिमंडल की K Raju की मुलाकात

परिसीमन में आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा एवं समानुपातिक वृद्धि सुनिश्चित करने की मांग को लेकर झारखंड प्रतिनिधिमंडल ने एआईसीसी प्रभारी के. राजू से की मुलाकात

RANCHI

प्रस्तावित लोकसभा एवं विधानसभा परिसीमन (Delimitation) के संदर्भ में झारखंड के आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की सुरक्षा को लेकर आज झारखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों एवं जनप्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एआईसीसी झारखंड प्रभारी श्री के. राजू से राज्य अतिथि गृह, मोराबादी, रांची में विस्तृत मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने किया। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिवक्ता, झारखंड उच्च न्यायालय, सुभाषिश रशीक सोरेन, डॉ. रामचन्द्र उराँव (सहायक प्राध्यापक, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ – NUSRL), अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीनारायण मुंडा, सेलेस्टीन कुजूर (लातेहार), राजेश लिंडा, शिवा कच्छप, बिनसाय मुंडा, अनिल उराँव, गोविन्द टोप्पो, विनय सिंह चेरो सहित झारखंड के सभी 24 जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बैठक के दौरान प्रस्तावित परिसीमन से झारखंड में अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव, संवैधानिक प्रावधानों, पूर्व परिसीमन के अनुभवों तथा आदिवासी हितों की सुरक्षा हेतु आवश्यक संवैधानिक एवं विधिक उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी से शीघ्र मुलाकात कर परिसीमन के संबंध में अपनी चिंताओं एवं सुझावों से उन्हें अवगत कराना चाहता है। उन्होंने एआईसीसी प्रभारी से अनुरोध किया कि इस बैठक की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही उन्होंने श्री राहुल गांधी को 30 अगस्त 2026 को मोरहाबादी मैदान, रांची में आयोजित होने वाली “आदिवासी एकता महाजुटान रैली” में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का भी आग्रह किया।

बंधु तिर्की ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सदैव आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की है और आगामी परिसीमन प्रक्रिया में भी यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किसी भी विधानसभा अथवा लोकसभा सीट में कमी न हो।

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना ने कहा कि यदि भविष्य में परिसीमन के दौरान आदिवासी आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखना है, तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330(2) एवं 332(3) में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि देशभर में लोकसभा एवं विधानसभाओं की कुल सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि की जाती है, तो अनुसूचित जनजाति (ST) एवं अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों में भी वर्तमान संख्या के अनुपात में 50 प्रतिशत वृद्धि सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित एवं सशक्त बना रहे।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन एवं डॉ. रामचन्द्र उराँव ने परिसीमन से संबंधित संवैधानिक एवं विधिक पहलुओं का विस्तार से प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि आवश्यक संवैधानिक संशोधनों एवं विधिक प्रावधानों के माध्यम से आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल द्वारा तैयार किए जा रहे विधिक प्रारूप की भी जानकारी साझा की।

प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनने के बाद एआईसीसी झारखंड प्रभारी श्री के. राजू ने आश्वस्त किया कि वे इस विषय पर लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक शीघ्र आयोजित कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा अत्यंत आवश्यक है तथा यदि विधानसभा एवं लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि होती है, तो अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों में भी उसी अनुपात में वृद्धि होनी चाहिए। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत सुझावों का समर्थन करते हुए उन्हें पार्टी नेतृत्व तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।

बैठक के दौरान केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब तक जनगणना में सरना धर्म कोड लागू नहीं किया गया है, जिससे आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान प्रभावित हो रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस विषय को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया।

बैठक के अंत में अजय तिर्की ने सभी अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन राज्य अतिथि गृह, मोराबादी, रांची में हुआ।

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