Vishad Kumar
वर्ष 1989-90 में अविभाजित बिहार का तत्कालीन हजारीबाग जिला का चुरचू प्रखंड, थाना गिद्दी (135) के अंतर्गत टोंगी गांव की जमीन खाता संख्या 14, प्लॉट संख्या 952 , 953 , 954 एवं 1025 का कुल रकबा 3.57 एकड़ को विक्रेता बिसम्बर सिंह, पिता – स्व० टुकन सिंह, शिवलाल सिंह, पिता – स्व० अनु सिंह ने क्रेता ईस्टर्न सिमेंट प्राईवेट लिमिटेड 3- रामाराव स्ट्रीट टी नगर, मद्रास -17 को रजिस्ट्री किया था। जिसका केवाला संख्या 4930 और तिथि 10-4-1989 दर्ज है। उस दौरान सिंहवाहिनी सीमेंट प्रा० लिमिटेड कंपनी स्थापित किया गई थी। उक्त कंपनी के मालिक द्वारा बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम लिमिटेड (BICICO) से ऋण लिया गया था। लेकिन कंपनी द्वारा ससमय ऋण की अदायगी नहीं करने के कारण बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम लिमिटेड ने ऋण वसूली के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि बिहार का विभाजन के बाद झारखंड राज्य बना, लेकिन झारखंड सरकार ने संयुक्त बिहार राज्य के विभिन्न कंपनियों के पूर्व के वित्तीय ऋण एवं लेनदेन संबंधी मामलों पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। फलस्वरूप बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम लिमिटेड ने ऋण वसूली हेतु नीलामी कि प्रक्रिया शुरू करते हुए विभिन्न समाचार-पत्रों में सेल नोटिस प्रकाशित करवाया।
सरकारी काम-काज की बेहद सुस्त और लचर विधि व्यवस्था का लाभ उठाते हुए पूर्व के विक्रेताओं के परिजनों द्वारा डारी अंचल के अधिकारियों व कर्मचारियों एवं भू-माफियाओं से सांठगांठ करके उस बेची गई जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार की गई और बिहार राज्य साख एवं विनियोग नि० लि० (BICICO) द्वारा घोषित नीलामी की अचल संपत्ति की फर्जीवाड़े से रजिस्ट्री और इनके द्वारा दाखिल-खारिज की प्रक्रिया करवा कर दर्जनों लोगों से करोड़ों रूपयों की ठगी को अंजाम दिया गया।
ऐसे फर्जीवाड़े के शिकार लोगों में एक हैं राजू विश्वकर्मा, जिन्होंने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ रामगढ़ जिला अंतर्गत पतरातू प्रखण्ड के बुजुर्ग जमीरा जो छावनी परिषद के वार्ड नंबर-7 के अंतर्गत आता है के बिनोद गोप, पिता – भीखन गोप, बबलू यादव, पिता – रामदेव यादव, घुटुवा (बरकाकाना) के दीपक गोप, पिता- देवानंद गोप एवं हजारीबाग जिला अंतर्गत डारी अंचल के हेसालौंग के उमेश राम, पिता – झब्बर राम को नामजद करते हुए गिद्दी थाना में एफआईआर संख्या – 21/24 दर्ज करायी है।
लेकिन स्थानीय गिद्दी पुलिस प्रशासन कि भूमिका भी इस मामले में निष्पक्ष नहीं रही। राजू विश्वकर्मा का आरोप है कि वे 7 जनवरी 2024 को गिद्दी थाने में अपना शिकायत पत्र एफआईआर के निमित्त दिया। जिसपर मौजूदा थाना प्रभारी सुधीर प्रसाद साहू ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता लगातार थाने जाकर आवेदन पत्र देते रहे लेकिन थाना प्रभारी ने केस रजिस्टर नहीं किया।

राजू विश्वकर्मा बताते हैं कि विडंबना यह है कि मुझसे एग्रीमेंट कर विक्रेताओं ने 28 फरवरी 2023 को पांच लाख रुपए अग्रीम चेक से प्राप्त किया और अन्य कागजी कार्यवाही के लिए भी मुझसे लगभग डेढ़ लाख रुपए लिए। लेकिन जमीन रजिस्ट्री में टाल-मटोल करते रहे इसपर 5 दिसंबर 2023 को हमने अपने द्वारा दिए गए अग्रीम रूपयों कि मांग की तो इसपर विक्रेता बिनोद गोप ने 1,30,000 रूपए के दो चेक दिये और एक महीने का समय लेते हुए पैसा मिलने का भरोसा दिलाया। मैंने तयशुदा समय पर दिये गये दोनों चेक अपने सिरका शाखा स्थित एसबीआई बैंक में जमा किया तो चेक बाउंस हो गया। दोबारा जमा किया तो फिर बाउंस हो गया। इस बारे में चेक जारी करने वाले बिनोद गोप को बार-बार फोन से संपर्क किया लेकिन वह काॅल रिसीव नहीं किया गया।
इससे परेशान हो राजू विश्वकर्मा ने गिद्दी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए एफआईआर दर्ज कराना चाहा लेकिन थाना प्रभारी सुधीर प्रसाद साहू टाल-मटोल करते रहे। बावजूद शिकायतकर्ता राजू डटे रहे तब जाकर थाना प्रभारी सुधीर प्रसाद साहू 24 जनवरी 2024 को आरोपी बिनोद गोप एवं अन्य सह आरोपियों और राजू विश्वकर्मा को थाने में बुलाया तथा आरोपी बिनोद गोप को डांटते हुए रूपए देने को कहा। इसपर बिनोद गोप ने एक महीने में रूपये देने की बात कही। थाना प्रभारी बिना किसी लिखित अनुबंध के उसे एक महीने का अतिरिक्त समय दे दिया।
पीड़ित राजू विश्वकर्मा ने बताया कि दरअसल थाना प्रभारी जानते थे कि चेक बाउंस केस दर्ज करने के बीच एक महीने का लीगल नोटिस पीरियड होता है इसके बाद ही 138 एन आई एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। गिद्दी थाना प्रभारी सुधीर प्रसाद साहू ने इस मामले में जानबूझकर आरोपियों सह भू-माफियाओं का पक्षपोषण किया।
बता दें कि जब पीड़ित शिकायतकर्ता राजू को इसके बाद भी भू-माफियाओं ने रूपए नहीं दिये, तो फिर वह गिद्दी थाना प्रभारी से मिले। इस बार थाना प्रभारी सुधीर प्रसाद साहू ने राजू विश्वकर्मा को कोर्ट में जाकर केस करने को कहा। इसपर पीड़ित ने आपत्ति जताई तो थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि फरवरी माह के बाद केस दर्ज कर लेंगे।
पीड़ित राजू विश्वकर्मा बताते हैं कि दरअसल इसमें भी उनकी चाल थी और वह यह कि मार्च में उनका ट्रांसफर होना था। इसलिए उन्होंने 2 मार्च 2024 को केस आईपीसी की धारा 420 , 406 , 34 , 38 एन आई एक्ट लिख रजिस्टर कर, एएसआई मोहन कुमार को (आईओ) जांच अधिकारी नियुक्त कर चलते बने। जांच अधिकारी ने सतही तौर पर जांच किया। प्रर्याप्त सुबूतों और गवाहों के मौजूद होने के बावजूद आरोपपत्र में उनका कोई जिक्र नहीं किया और ना ही केस से जुड़े गवाहों से कभी मिले अपने मन से गवाहों का बयान भी मनगढ़ंत तौर पर आरोपपत्र में लिखा। पूरे केस में जालसाजी के अनेकों सुस्पष्ट तथ्य मौजूद हैं, जिसे जांच अधिकारी ने जानबूझकर अभियुक्तों का पक्षपोषण करने के निमित्त छिपाया। जबकि वास्तविकता सरकारी जमीन का फर्जीवाड़ा रजिस्ट्री से स्पष्ट जुड़ा हुआ है।
उपरोक्त मामले में जांच अधिकारी ने उचित तौर पर गहन जांच-पड़ताल नहीं करते हुए सतही कार्यवाही किया और इसे महज सिविल डिस्प्यूट (‘दीवानी विवाद’) के बतौर पेश किया। जबकि यह पूरा मामला षड्यंत्रपूर्वक जालसाजी से रूपये हड़पने का है।
जांच अधिकारी की भूमिका निष्पक्ष नहीं।
पीड़ित के अनुसार जांच अधिकारी ने जानबूझकर अभियुक्तों का पक्षपोषण करने के निमित्त केस के अहम वास्तविक तथ्यों को छिपाया। शिकायतकर्ता के गवाहों से पूछ-ताछ किये बगैर गवाहों के हवाले से झूठे तथ्य पेश कर न्यायालय में अपना आरोपपत्र समर्पित किया है। जबकि वास्तविकता यह है कि भू-माफियाओं ने बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम लिमिटेड कि घोषित नीलामी की अचल संपत्ति को षड्यंत्रपूर्वक जालसाजी से बेचने का गंभीर अपराध किया है। जबकि गिद्दी पुलिस प्रभारी ने इसे महज़ सिविल डिस्प्यूट के तौर पर पेश किया है। जबकि पूरा मामला षड्यंत्रपूर्वक जालसाजी से आपराधिक धोखाधड़ी करने से संबंधित है। इसमें कई अन्य प्रभावशाली लोगों के जुड़े होने की संभावना भी बनती है। जो जांच के विषय हो सकते है।
फर्जी दस्तावेज दिखा कर दर्जनों लोगों से जमीन बिक्री का सौदा कर रूपये उगाही करने वालों में दीपक गोप – घुटवा, बबलू यादव और बिनोद गोप – बुजुर्ग जमीरा, रामगढ़, उमेश राम – हेसालौंग, मनिनाथ सिंह, शनिनाथ सिंह, दिलीप सिंह, भोला सिंह, सीतू देवी, फूलमुनिया देवी, किशुन सिंह और बिलासी देवी – टोंगी, हजारीबाग शामिल हैं।
इन तमाम मामलों पर पीड़ित राजू विश्वकर्मा ने झारखंड सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरूआ को 15 जून 2025 को एक्स पोस्ट (ट्वीट) कर मामले कि शिकायत की और कार्रवाई की मांग की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने उपायुक्त हजारीबाग को इस मामले में शिकायतकर्ता को तत्काल मदद करते हुए दोषियों पर विधिसम्मत कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
इतना ही नहीं शिकायतकर्ता राजू विश्वकर्मा ने 29 जुलाई 2025 और 29 अगस्त 2025 को आयोजित उपायुक्त हजारीबाग के जनता दरबार में उपस्थित होकर मामले कि उच्च स्तरीय जांच और विधिसम्मत कठोर कार्रवाई हेतु आवेदन पत्र (1275) दिया। उपायुक्त हजारीबाग के सलाह पर पुलिस अधीक्षक हजारीबाग से मिलकर निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हेतु आवेदन पत्र दिया। परन्तु अब तक 10 महीने बीतने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है। यह बेहद अफसोसजनक है। भ्रष्टाचार पर प्रशासनिक चुप्पी आम जनता के हक और उसके न्याय पाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
राजू विश्वकर्मा का कहना है कि राज्य कि राजधानी रांची से लेकर अन्य शहरों में भी भू-माफियाओं से लोग आतंकित हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन भी ऐसे लोगों पर सतही कार्यवाही किया करती है। जिससे इनका हौसला बुलंद रहता है। न्यायालय में न्याय भी सबूतों एवं गवाहों के आधार पर मिलता है। और इसमें पुलिस कि अहम भूमिका होती है।
