कलास 9 के सिलेबस में शामिल किया गया इमरजेंसी का अध्याय, लोकतंत्र की चुनौतियों के बहाने नई बहस



NEW DELHI

भारत में 1975 में लागू हुई इमरजेंसी के लगभग 50 साल बाद पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में इस ऐतिहासिक घटना को शामिल किया गया है। यह बदलाव नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की नई किताब “Understanding Society: India and Beyond” में किया गया है, जिसमें इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।

नई पुस्तक में यह विषय उस अध्याय के तहत जोड़ा गया है जिसमें भारत के लोकतंत्र की विशेषताओं और उसकी चुनौतियों पर चर्चा की गई है। NCERT के अनुसार यह पहली बार है जब कक्षा 9 की किताब में इमरजेंसी पर विस्तृत सेक्शन शामिल किया गया है।

पाठ्यपुस्तक में 1975–77 के दौरान लागू इमरजेंसी की पृष्ठभूमि, उससे पहले देश में बढ़ते असंतोष, महंगाई, बेरोजगारी और विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि किस तरह तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi के नेतृत्व में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए इमरजेंसी लागू की गई थी, जिसके दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई।

किताब में यह भी बताया गया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़े प्रभावों के बीच किस तरह छात्र आंदोलनों और जन-आंदोलनों ने भूमिका निभाई, जिनका नेतृत्व Jayaprakash Narayan ने किया था, खासकर बिहार और गुजरात में।

इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वालों को श्रद्धांजलि दी और इसे संविधान पर गंभीर हमला बताया।

नई किताब में लोकतंत्र से जुड़ी अन्य चुनौतियों जैसे फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता पर भी चर्चा की गई है। इसके साथ ही “लोकतंत्र और आप” नामक नया सेक्शन जोड़ा गया है, जिससे छात्रों को नागरिक जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक भागीदारी की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

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