Ranchi
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन “नवजीवन” के अंतर्गत कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय भाकपा (माओवादी) संगठन के शीर्ष कमांडरों और सदस्यों समेत गुमला जिले में सक्रिय जेजेएमपी के उग्रवादियों ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में कई हार्डकोर कमांडर और मारक दस्ते के सदस्य शामिल हैं, जिनके पास बड़ी मात्रा में हथियार और गोलियां बरामद हुई हैं।

44 गिरफ्तार, 29 सरेंडर और 22 नक्सली ढेर
महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के निर्देशन में झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर द्वारा संयुक्त रूप से लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2026 में अब तक 44 नक्सलियों की गिरफ्तारी, 29 नक्सलियों का आत्मसमर्पण और पुलिस मुठभेड़ में 22 उग्रवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
सुरक्षा बलों ने पश्चिमी सिंहभूम के नक्सल प्रभावित इलाकों में आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत करने के लिए सारंडा क्षेत्र में 21 नए एडवांस कैंप लोकेशन (ACL) और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) भी स्थापित किए हैं।
मिसिर बेसरा और असीम मंडल के दस्ते को तगड़ा झटका
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश उग्रवादी भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और असीम मंडल की टीम से जुड़े हुए थे। इनमें एसजेडसीएम, एसीएम और दस्ता सदस्य शामिल हैं, जो कोल्हान और सारंडा के जंगल-पहाड़ी इलाकों की गहरी जानकारी रखते थे।
कुल 25 माओवादी कमांडर और दस्ता सदस्यों ने 16 हथियार और 2857 गोलियों के साथ सरेंडर किया। वहीं गुमला में सक्रिय जेजेएमपी के 2 कमांडर और सदस्यों ने भी एक हथियार और 130 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया।
पुलिस बोली- मुख्यधारा में लौटें बाकी माओवादी
झारखंड पुलिस ने कहा कि लगातार बढ़ती दबिश, संगठन के भीतर शोषण और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण उग्रवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पुलिस ने दावा किया कि राज्य के बाहर तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी दबाव के कारण कई नक्सलियों ने सरेंडर किया है।
पुलिस ने शेष बचे माओवादियों से हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है।
