मिथिलांचल के बाजार में सुस्ती और मांग घटी
पश्चिम एशिया संकट से मखाना व्यापार प्रभावित
DARBHANGA
पश्चिम एशिया में जारी महासंग्राम का असर अब बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के मखाना कारोबार पर साफ दिखने लगा है। विदेशों में निर्यात के लिए भेजा गया मखाना जहाजों और विदेशी गोदामों में फंसा हुआ है, जिससे स्थानीय व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
कीमतों में भारी गिरावट से बढ़ी चिंता
कुछ महीने पहले तक 800 रुपये प्रति किलो बिकने वाला मखाना अब घटकर 550 से 600 रुपये प्रति किलो रह गया है। यानी करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो की गिरावट ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में मांग कमजोर पड़ने से खरीदारी लगभग ठप हो गई है और पूंजी फंसने से व्यापार प्रभावित हो रहा है।
निर्यात ठप, स्थानीय बाजार पर असर
व्यापारियों के अनुसार, जो कारोबारी विदेशों में मखाना भेजते थे, उनका पुराना स्टॉक अभी तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में वे नया माल खरीदने से बच रहे हैं। अरब देशों में मखाने की अच्छी खपत थी, लेकिन मौजूदा हालात में सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिससे जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों ने बताया अस्थायी संकट
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक Dr. Manoj Kumar ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता का असर व्यापार पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गिरावट अस्थायी है और जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होंगे, कीमतों और निर्यात में फिर से बढ़ोतरी होगी।
नए बाजार तलाशने की जरूरत
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि निर्यातकों को केवल मध्य-पूर्व या अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे नए बाजारों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। भारत, खासकर बिहार, दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत मखाना उत्पादन के साथ इस क्षेत्र में अग्रणी है, जिससे भविष्य में बेहतर संभावनाएं बनी हुई हैं।
