Ranchi
झारखंड में पहली बार आयोजित ‘धरती आबा जनजातीय फिल्म महोत्सव – 2025’ का मंगलवार को डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान में उद्घाटन किया गया। कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर कहा कि यह महोत्सव सिर्फ फिल्मों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन, उनकी संस्कृति, परंपरा और संघर्षों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का एक अनूठा प्रयास है।
मंत्री ने कहा, “जब भी किसी जनजातीय समुदाय या जीवन पर फिल्म बनाई जाती है, तो उसका कथानक और दृश्य यथार्थ पर आधारित होना चाहिए। कला और सिनेमा का दायित्व समाज की सच्चाई को उजागर करना है ताकि नई पीढ़ियाँ अपनी जड़ों और अस्मिता को समझ सकें। इस पहल से आदिवासी कलाकारों और युवाओं को अपनी कहानियों को साझा करने का सशक्त मंच मिलेगा।”

फेस्टिवल में झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित 15 राज्यों की 70 से अधिक फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें “Palash”, “हेंडे सोना एंड ब्लैक गोल्ड”, “फूलो”, “कुसुम”, “नाची से बाची” जैसी चर्चित फिल्में और कई World Premiere तथा National Premiere शामिल हैं।
इस अवसर पर विभाग के सचिव कृपा नन्द झा, रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान के निदेशक करमा ज़िम्पा भुट्टिया, विशेष सचिव नेलसन बागे, कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। महोत्सव 14 से 16 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें आदिवासी दर्शन, उनकी संघर्ष गाथाएँ और सांस्कृतिक धरोहर को करीब से अनुभव करने का अवसर मिलेगा। यह पहल आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और सृजनशीलता को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

