हत्या, रेप और वसूली से त्रस्त जनता, पुलिस नाकाम; सरकार पर गंभीर आरोप
RANCHI
रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबा प्रसाद ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अपराधियों से त्रस्त है और हर दिन हत्या, दुष्कर्म और जबरन वसूली जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में हजारीबाग में 13 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी विफलता बताया। कहा डीजीपी का नाम तदाशा नहीं हताशा मिश्रा होना चाहिए।
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध पर नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो गया है और पुलिस व्यवस्था चरमराई हुई है। उनका कहना था कि पहले गुमला हत्या के मामलों में आगे था, लेकिन अब रांची इस सूची में ऊपर आ गया है, जो हालात की गंभीरता को दिखाता है।
पुलिस पर सीधा हमला, सिस्टम पर सवाल
उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम लोगों के मामलों में पुलिस निष्क्रिय रहती है, लेकिन रैयतों के घर तोड़ने जैसे मामलों में “सुपर कॉप” बन जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पुलिस का नंबर 112 है, लेकिन 112 बार कॉल करने पर भी जवाब नहीं मिलता।
डीजीपी की नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की और कहा कि यह पद “भाड़े पर” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिटायरमेंट के बाद भी अधिकारियों को बनाए रखा जा रहा है, जिससे सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
संगठित अपराध और माफिया पर आरोप
अंबा प्रसाद ने कहा कि जामताड़ा में साइबर क्राइम चरम पर है और धनबाद में माफिया सक्रिय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मिलीभगत के बिना संगठित अपराध संभव नहीं है। उनका कहना था कि “रक्षक ही भक्षक बन गए हैं” और अपराधी पुलिस का बोर्ड लगाकर खुलेआम घूम रहे हैं या फर्जी पासपोर्ट बनाकर विदेश भाग रहे हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पुलिस की गाड़ियों पर “आपकी सुरक्षा हमारा कर्तव्य” लिखा है, तो आखिर सुरक्षा किसकी हो रही है? उनके मुताबिक आम जनता को इसका लाभ नहीं मिल रहा।
सरकार और राजनीति पर निशाना
अंबा प्रसाद ने राज्य सरकार पर “स्पॉन्सर्ड स्वतंत्रता” का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है, बल्कि बाहरी प्रभाव में काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का रिमोट कंट्रोल राज्य सरकार के पास है, लेकिन असली नियंत्रण केंद्र के हाथ में है।
विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कई लोग चुप्पी साधे हुए हैं और अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व उनके साथ है और पार्टी के भीतर कुछ लोगों के बयान पूरी पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अंबा प्रसाद ने राज्य में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया और सरकार पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
