पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं? केंद्र के बयान पर बढ़ा विवाद, विपक्ष और लोगों ने उठाए सवाल

CENTRAL DESK

केंद्र सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, बल्कि केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक दस्तावेज है। सरकार का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि दशकों से यही कानूनी स्थिति बनी हुई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा को सुगम बनाना है। किसी व्यक्ति के पास भारतीय पासपोर्ट होने का अर्थ यह नहीं है कि वही अकेले उसकी नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण बन जाता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस संबंध में अदालतों ने पहले भी इसी तरह की व्याख्या की है।

हालांकि, सरकार के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो आम नागरिक अपनी भारतीय नागरिकता किस दस्तावेज के आधार पर साबित करेंगे।

प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने सरकार के इस रुख को “अजीब और असंगत” बताते हुए सवाल किया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो क्या सरकार गैर-भारतीयों को भी ऐसे यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। वहीं, कई विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा और स्पष्ट नीति की मांग की।

सरकार ने अपने बचाव में कहा कि भारतीय कानून में नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण या प्राकृतिककरण जैसी प्रक्रियाओं के आधार पर निर्धारित होती है। कई मामलों में नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन हर भारतीय नागरिक के पास ऐसा कोई अलग प्रमाणपत्र होना जरूरी नहीं है। इसलिए किसी एक दस्तावेज को सार्वभौमिक नागरिकता प्रमाण मानना कानूनी रूप से सही नहीं है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट केवल उन लोगों को जारी किया जाता है जो भारतीय नागरिक हैं, लेकिन उसका मूल उद्देश्य यात्रा सुविधा प्रदान करना है। यही कारण है कि उसे कानूनी रूप से नागरिकता के अंतिम प्रमाण के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है। मंत्रालय का दावा है कि यह व्यवस्था नई नहीं है और वर्षों से लागू है।

सरकार के इस स्पष्टीकरण ने नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों और उनकी वैधानिक स्थिति पर एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस विषय पर और अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता पड़ सकती है, ताकि आम लोगों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

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