आदिवासी की नई प्रेरणा: चौकीदार से लेकर नगरपालिका का चैयरमेन तक, केरल में विजयन ने इतिहास रचा

वायनाड में प. विश्वनाथन की जीत से टकराई बधाई की लहर, आदिवासी समुदाय को नई प्रेरणा

Kerala (Wayanad)

पानिया जनजाति से आने वाले चौकीदार प. विश्वनाथन ने केरल के कालपेट्टा नगरपालिका के अध्यक्ष के रूप में शपथ ग्रहण कर इतिहास रचा है। वह अपने समुदाय से पहले ऐसे नेता बने हैं, जिन्होंने स्थानीय निकाय में सर्वोच्च पद तक की यात्रा पूरी की है।

विश्वनाथन ने हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में एदागुनी वार्ड नंबर 28 के सामान्य सीट से जीत हासिल की और जब कालपेट्टा नगरपालिका का अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित किया गया, तो उन्हें इस प्रतिष्ठित पद के लिए चुना गया। यह उनकी राजनीतिक मेहनत और सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम का प्रतीक माना जा रहा है।

40 वर्षीय विश्वनाथन पेशे से चौकीदार हैं, साथ ही वे एक लोक गायक और सीपीआई(एम) के कार्यकर्ता भी रहे हैं। अपने चुनावी सफर के बारे में उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय आज भी मुख्यधारा के समाज की तुलना में कई क्षेत्रों में पीछे है और वे बदलाव लाना चाहते हैं, जिससे उनके समुदाय के लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले

विद्यालयों और सामाजिक जीवन की सीमाओं से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचने का अपना अनुभव साझा करते हुए विश्वनाथन ने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि मेरा यह पद मेरे समुदाय के अन्य लोगों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।”

उनके शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रथम कदम यह था कि उन्होंने अपनी आधिकारिक गाड़ी को रोककर अपनी पारंपरिक ‘उन्नाथी’ (जनजातीय कॉलोनी) में अपने माता-पिता से आशीर्वाद लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में विश्वनाथन को अपने माता-पिता के पैर छूते देखा गया, और उनकी मां ने कहा: “आज मेरे बेटे ने इतना ऊंचा मुकाम पाया है, मैं बहुत खुश हूँ।”

विश्लेषकों के अनुसार यह घटना न केवल पानिया समुदाय, बल्कि सम्पूर्ण अनुसूचित जनजाति के लिए एक मोटिवेशनल मिसाल बन गई है। पानिया समुदाय केरल में सबसे बड़े अनुसूचित जनजातियों में शामिल हैं और यह मुख्य रूप से वायनाड, कोज़ीकोड, कन्नूर और मलप्पुरम जिलों में पाया जाता है।

सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता वी. हरीस ने कहा कि विश्वनाथन के चुने जाने से यह साबित होता है कि जनजातीय समुदाय के लोग भी मुख्यधारा की राजनीति में हिस्सा लेकर बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है कि विविध पृष्ठभूमि वाले लोग लोकतांत्रिक नेतृत्व के पात्र हैं। इस ऐतिहासिक घटना पर सोशल मीडिया और स्थानीय समुदायों में भी बधाई संदेशों की लहर देखने को मिल रही है। कई सामाजिक समूहों और अधिकार समर्थकों ने इसे जनजातीय समुदायों के लिए बड़े बदलाव की शुरुआत बताया है।

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