ANIL JAIN
देश ने अभी तक बलात्कारियों और हत्यारों के जेल से छूटने पर लोगों को जश्न मनाते और जेल से छूटे उन लोगों का स्वागत करते देखा है। अब देखने में आ रहा है कि एक मेडिकल कॉलेज बंद होने पर ढोल ढमाके के साथ खुशी मनाई जा रही है।
आमतौर पर होता यह है कि लोग अपने शहर या जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हैं और जब उनकी मांग पूरी हो जाती है तो वे ढोल-ढमाके के साथ अपनी खुशी का इज़हार करते है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में इसका ठीक उलटा हुआ है। वहां लोगों ने मेडिकल कॉलेज बंद कराने के लिए संघर्ष किया और जब उनकी मांग पूरी हो गई तो उन्होंने जमकर खुशी मनाई।
जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता भारत सरकार के नेशनल मेडिकल कमीशन ने इसलिए रद्द कर दी, क्योंकि 50 सीटों वाले उस कॉलेज में मैरिट के आधार 42 मुस्लिम छात्रों को दाखिला मिला था। दाखिला पाने वाले आठ अन्य छात्रों में 7 हिंदू और एक सिख था। ये सभी 50 छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा (NEET) में सफल होकर आए थे।
जम्मू के हिंदू संगठनों को यह बात हजम नहीं हो रही थी। उनका कहना था कि वैष्णो देवी के चढ़ावे से चलने वाले मेडिकल कॉलेज में 50 में से 42 सीटों पर मुसलमान कैसे आ सकते हैं? बस इसी बात को लेकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज बंद करने की मांग की और उनकी मांग पर सरकार ने तकनीकी कमियों का बहाना बनाते हुए मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी।
अपनी मांग पूरी होने पर हिन्दू संगठनों ने वहां ढोल पीटे, नाच गाना किया और मिठाई बांटी कर खुशी मनाई। सवाल है कि हिंदू बच्चों को किसने रोका था ज्यादा से ज्यादा सीटों के लिए मैरिट बनाने से?
हैरानी की बात है कि जिन मुसलमानों से नफरत के चलते मेडिकल कॉलेज बंद कराया गया है, उन्हीं मुसलमानों की पीठ पर लद कर हिंदू तीर्थयात्री वैष्णो देवी की यात्रा करते हैं, लेकिन तब उनके धर्म पर कोई आंच नहीं आती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्वयंसेवकों का गजब का चरित्र निर्माण कर रहा है और उनके जरिये वैसा ही राष्ट्र निर्माण भी! ऐसी आत्मघाती और नफरती राजनीतिक जमात भारत के अलावा दुनिया में शायद ही कहीं होगी।
(वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन की फेसबुक पोस्ट)
