CHAIBASA
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य की गठबंधन सरकार पर आदिवासी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत सेरेंगसिया घाटी पहुंचे चंपाई सोरेन ने वीर पोटो हो समेत कोल विद्रोह के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सरकार पर जमकर निशाना साधा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जल, जंगल, जमीन और परंपराओं की रक्षा के लिए आदिवासी पूर्वजों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया था, वही अधिकार आज फिर खतरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार ने वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़ते हुए सेरेंगसिया के ग्रामीणों द्वारा आयोजित सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रमों को जबरन रद्द करा दिया, सिर्फ इसलिए क्योंकि ग्रामीणों ने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।
चंपाई सोरेन ने कहा कि भोगनाडीह से लेकर सेरेंगसिया तक शहीदों के परिजनों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों के फैसलों को नजरअंदाज कर पुलिस के बल पर सरकारी आदेश थोपे जा रहे हैं, जिसे आदिवासी समाज किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने सरकार पर सारंडा क्षेत्र में बसे लाखों आदिवासी परिवारों को उजाड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया। चंपाई सोरेन ने कहा कि खनन कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाती है, लेकिन सारंडा में हजारों वर्षों से बसे आदिवासियों के अधिकारों पर एक शब्द भी नहीं बोलती। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से नहीं है, बल्कि आदिवासियों को उजाड़ने की नीति से है।
पेसा कानून को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा अध्यक्ष की नियुक्ति में “अन्य” का प्रावधान रखकर सरकार ने पिछला दरवाजा खोल दिया है, जिससे फर्जी लोगों के जरिए मनमानी की जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शेड्यूल एरिया में राज्यपाल संरक्षक की भूमिका में होते हैं, तो उपायुक्त को मालिक कैसे बनाया जा सकता है।
चंपाई सोरेन ने दावा किया कि जिस कैबिनेट बैठक में पेसा अधिनियम को मंजूरी दी गई, उसी बैठक में नोवामुंडी में बिना ग्राम सभा की अनुमति के 850 एकड़ जमीन हिंडाल्को को सौंप दी गई। उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल में कोल ब्लॉक आवंटित होने के बावजूद वन क्षति की भरपाई कोल्हान के शेड्यूल एरिया में क्यों की जा रही है, जहां आदिवासी हजारों वर्षों से खेती करते आ रहे हैं और जहां देशाउली व सरना स्थल मौजूद हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण की दोहरी मार झेल रहे आदिवासी समाज को खत्म करने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो आदिवासी सभ्यता को मिटाने का काम यह सरकार कर देगी, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद भी नहीं कर सका।
इससे पहले चाईबासा पहुंचने पर तांबो चौक समेत विभिन्न स्थानों पर नो एंट्री आंदोलनकारियों और आदिवासी संगठनों से जुड़े हजारों लोगों ने चंपाई सोरेन का भव्य स्वागत किया। गीतीलता शहीद स्थल में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद वे समर्थकों के साथ सेरेंगसिया पहुंचे, जहां शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष महेंद्र लागुरी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
