Munger
बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर अनुमंडल अंतर्गत दूधपनिया गांव में फ्लोराइड युक्त पानी ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। गांव में पीने के पानी के लगभग सभी स्रोत दूषित बताए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण वर्षों से जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बीते एक साल में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों ग्रामीण हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पुराने और नए हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है। सुरक्षित पेयजल का कोई विकल्प नहीं होने के कारण इसी पानी का इस्तेमाल पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में किया जा रहा है।
दूषित पानी का असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखता है। शुरुआत में पैरों और कमर में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और चलने-फिरने में परेशानी होती है। समय के साथ हालत इतनी बिगड़ जाती है कि कई लोग अपंगता की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बीमारियों के चलते गांव में कई लोगों की जान जा चुकी है, जिससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब उन्हें साफ और सुरक्षित पीने का पानी मिलेगा।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने नए चापाकल लगाने और नल-जल योजना के तहत फिल्टर लगाने की कोशिश की, लेकिन नए हैंडपंप से भी फ्लोराइड युक्त पानी निकलने पर उसे बंद करना पड़ा। फिलहाल ग्रामीणों को पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है, जिसे लोग नाकाफी समाधान मान रहे हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि गांव में स्थायी समाधान के तौर पर फ्लोराइड ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाए और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, ताकि आने वाले समय में और जानें न जाएं और लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके।
