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Jamshedpur/Potka
पोटका प्रखंड के नुआग्राम की धरती से निकलकर साहित्य के क्षेत्र में निरंतर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले वरिष्ठ साहित्यकार सुनील कुमार दे को साहित्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए “पद्म” सम्मान प्रदान किए जाने की मांग उठने लगी है। सुनील कुमार दे वर्ष 1971 से निरंतर साहित्य साधना में सक्रिय हैं। बांग्ला और हिन्दी दोनों भाषाओं में लेखन करते हुए उनकी अब तक 34 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी 35वीं पुस्तक ‘सबूज सकाल’ का विमोचन 12 जनवरी 2026 को हाता स्थित माताजी आश्रम में विवेकानंद जयंती के अवसर पर किया गया।
कवि, लेखक, गीतिकार, कहानीकार, इतिहासकार, उपन्यासकार एवं नाटककार के रूप में उन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओं में अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी रचनाओं में समाज, मानवता, इतिहास, धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना जैसे विविध विषयों की प्रभावी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
एक साहित्यकार द्वारा पांच दशकों से अधिक समय तक निरंतर साहित्य साधना करते हुए 35 पुस्तकों का सृजन करना निश्चित रूप से गौरवपूर्ण और उल्लेखनीय उपलब्धि है। साहित्य के प्रति उनके समर्पण और योगदान को विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित भी किया गया है।
साहित्यप्रेमियों एवं सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे वरिष्ठ और समर्पित साहित्यकारों के योगदान को व्यापक स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए। इसलिए सुनील कुमार दे की दीर्घकालीन साहित्य सेवा, बहुभाषी लेखन तथा 35 पुस्तकों के सृजन को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत सरकार के प्रतिष्ठित “पद्म” सम्मान से सम्मानित किए जाने की मांग की जाती है। सभी साहित्यप्रेमियों, लेखकों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस मांग का समर्थन करें और साहित्य साधना को उचित सम्मान दिलाने की इस पहल को मजबूत बनाएं।


