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राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए पद छोड़ने का फैसला लिया है। उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं, लेकिन उनके पूर्व चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम प्राथमिकी में आने के बाद विपक्ष लगातार जवाबदेही की मांग कर रहा था। इसी बीच अनिल मिश्रा ने भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट से अलग होने का निर्णय लिया।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद और कीमती सामान में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर संकेत किया गया, जिसके बाद ट्रस्ट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
चंपत राय लंबे समय से राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण अभियान का प्रमुख चेहरा रहे हैं, जबकि अनिल मिश्रा भी ट्रस्ट के प्रभावशाली सदस्यों में शामिल रहे हैं। उनके इस्तीफे को मंदिर प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग तेज कर दी है।
