बरसात के बीच भी नहीं थमा जनउत्साह, शोषित-वंचित समाज ने सम्मान और अधिकार की लड़ाई में तीर-धनुष को चुना अपना प्रतीक
Kokrajhar, Assam
असम के गोसाईगांव, कोकराझार में आयोजित जनसभा के दौरान आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की जोरदार गूंज सुनाई दी। सभा में “जोहार… जोहार… जय आदिवासी” के नारों के बीच यह संदेश दिया गया कि सदियों से शोषण और उपेक्षा झेल रहे समाज अब चुप नहीं बैठेगा, बल्कि अपने हक और सम्मान के लिए निर्णायक संघर्ष करेगा। सभा को विधायक लुईस मरांडी ने संबोधित किया।
इस दौरान वक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि अब समय आ गया है जब वंचित और पीड़ित वर्ग अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर मतदान के जरिए जवाब देगा। “तीर-धनुष” को प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हुए लोगों से अपील की गई कि वे इसे अपना समर्थन और आशीर्वाद दें, ताकि उनकी आवाज सत्ता तक पहुंच सके।
बरसात में भी उमड़ा जनसैलाब
गोसाईगांव और कोकराझार में हो रही इस सभा की खास बात यह रही कि लगातार बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। भारी संख्या में लोग मैदान में डटे रहे, जो यह दर्शाता है कि इस बार चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और पहचान की लड़ाई बन चुका है।
वंचित समाज के लिए निर्णायक चुनाव
सभा में यह भी कहा गया कि आने वाला असम विधानसभा चुनाव शोषित और वंचित वर्ग के लिए निर्णायक साबित होगा। वर्षों से उपेक्षित समाज अब अपने वोट की ताकत को समझ चुका है और वह अपने अधिकारों के लिए सही प्रतिनिधि का चयन करेगा।
हेमंत ने बांग्ला में कहा कि “हमारा प्रतीक तीर-धनुष है”, और जनता से अपील की कि वे इसे अपना समर्थन देकर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करें।
