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बिहार में आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने की घटना ने अब गंभीर राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया है। यह विवाद बिहार की सीमाओं से बाहर निकलते हुए दो राज्यों—उत्तर प्रदेश और कर्नाटक—तक पहुंच गया है, जहां मुख्यमंत्री के खिलाफ ज़ीरो FIR दर्ज कराई गई है।
नीतीश कुमार के खिलाफ पहली ज़ीरो FIR उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के केसरबाग थाने में दर्ज की गई है। यह शिकायत समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता सुमैया राणा ने कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक मंच पर एक महिला का हिजाब हटाना महिला सम्मान और गरिमा के खिलाफ है। शिकायत में कहा गया है कि इस घटना से बड़ी संख्या में महिलाओं में नाराज़गी है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
इसी मामले में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी कानूनी कार्रवाई की गई है। यहां वकील ओवैज हुसैन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ ज़ीरो FIR दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि यह कृत्य महिला की मर्यादा भंग करने की श्रेणी में आता है और सार्वजनिक जीवन में बैठे व्यक्ति से ऐसी संवेदनशीलता की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता सुमैया राणा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह स्वयं भी हिजाब पहनती हैं और यदि उनके साथ इस तरह का व्यवहार होता तो वह भी चुप नहीं रहतीं। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी महिलाओं के निजी अधिकार और सम्मान से जुड़ा है।
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार व्यवहार करना चाहिए। विपक्ष इस घटना को सत्ता का अहंकार बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष बचाव की स्थिति में नजर आ रहा है।
हिजाब से जुड़ा यह मामला अब कानून, राजनीति और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच एक बड़े विमर्श का रूप ले चुका है।
