Bounsi (Banka)
बिहार में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की चल रही जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फर्जी अंक-पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले एक शिक्षक के खिलाफ सेवानिवृत्ति के बाद केस दर्ज किया गया है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
जाली अंक-पत्र से मिली थी नौकरी
मिली जानकारी के अनुसार, बौंसी प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बभनगामा में कार्यरत रहे शिक्षक गजेंद्र प्रसाद मंडल पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने का आरोप है। उनका नियोजन वर्ष 2008 में शारीरिक शिक्षक के रूप में हुआ था। नियुक्ति के दौरान उन्होंने बीपीईडी का अंक-पत्र प्रस्तुत किया था, जिसे उत्कल विश्वविद्यालय से जारी बताया गया था।
जांच में फर्जी निकला प्रमाणपत्र
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई जांच में जब संबंधित विश्वविद्यालय से प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया गया, तो बड़ा खुलासा हुआ। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षक द्वारा दिखाए गए 605 अंक का अंक-पत्र पूरी तरह जाली है। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की।
रिटायरमेंट के बाद कसा शिकंजा
हैरानी की बात यह है कि आरोपी शिक्षक अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं और करीब 10 वर्षों से यह जांच लंबित थी। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद उन्होंने स्वैच्छिक त्यागपत्र भी नहीं दिया था। अब निगरानी विभाग के आवेदन पर बौंसी थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। थानाध्यक्ष पंकज कुमार झा ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में खासकर ऐसे शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ गई है, जो संदिग्ध प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे हैं।
