टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का करारा तमाचा, फैसले के बाद भी भारत से वसूली की जिद पर अड़े ट्रंप

 

 

 

6-3 के फैसले से ट्रंप को झटका, लेकिन 10% नया टैरिफ साइन; भारत डील पर जताया भरोसा

CENTRAL DESK

अमेरिका की शीर्ष अदालत Supreme Court of the United States ने राष्ट्रपति Donald Trump की वैश्विक टैरिफ नीति को अवैध करार देते हुए बड़ा झटका दिया है। शुक्रवार को आए 6-3 के बहुमत वाले फैसले में अदालत ने साफ कहा कि जिस कानूनी आधार पर टैरिफ लगाए गए, वह वैध नहीं था। चीफ जस्टिस John Roberts ने बहुमत का निर्णय सुनाते हुए कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट में आयात पर टैरिफ लगाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। संविधान के अनुसार यह शक्ति कांग्रेस के पास है।

टैरिफ से वसूली गई रकम पर नई उलझन

फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब तक वसूले गए अरबों डॉलर का क्या होगा? रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रकम 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आयातकों को रिफंड मिलेगा या नहीं। यह मुद्दा निचली अदालत पर छोड़ दिया गया है, जिससे नई कानूनी अनिश्चितता पैदा हो गई है।

ट्रंप ने अदालत की इस चुप्पी की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहेगा।

ट्रंप का पलटवार – नया 10% टैरिफ लागू

फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ साइन कर दिया। उन्होंने Trade Act of 1974 के सेक्शन 122 के तहत यह कदम उठाया, जो 150 दिनों तक लागू रह सकता है। साथ ही, सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा आधार) और सेक्शन 301 (अनुचित व्यापार प्रावधान) के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे। ट्रंप का कहना है, “हम पीछे नहीं हटेंगे। हम और ज्यादा पूंजी जुटाएंगे।”

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर?

फैसले के तुरंत बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर सवाल पूछा गया तो ट्रंप ने साफ कहा, “कुछ भी नहीं बदला है। भारत टैरिफ का भुगतान करेगा।”

उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को “शानदार” बताते हुए कहा कि अब समझौता निष्पक्ष है।

ट्रेड डील के तहत अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर सामान्य टैरिफ दर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। हालांकि 18 प्रतिशत टैरिफ के कानूनी आधार पर अभी भी स्पष्टता नहीं है।

किन देशों पर पड़ा असर?

10 प्रतिशत के बेसलाइन टैरिफ और कुछ देशों पर उच्च दरों वाले टैरिफ रद्द कर दिए गए हैं। मेक्सिको, कनाडा और चीन पर उसी कानूनी आधार पर लगाए गए टैरिफ भी अमान्य घोषित हुए। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और विशेष व्यापार प्रावधानों के तहत लगाए गए टैरिफ फिलहाल प्रभावी रहेंगे।

आगे की राह

ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वे वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर टैरिफ जारी रखेंगे। 2026 के राजस्व अनुमान पर भी सरकार ने कोई बदलाव न होने की बात कही है।

स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अमेरिकी व्यापार नीति में बड़ा मोड़ ला दिया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा। भारत-अमेरिका ट्रेड संबंध फिलहाल स्थिर बताए जा रहे हैं, लेकिन कानूनी और आर्थिक स्तर पर आने वाले महीनों में नई बहसें तय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *