RANCHI
झारखंड प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता कैलाश यादव ने यूजीसी रेगुलेशन 2025-26 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए त्वरित स्टे को मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समता संवर्धन एवं समानता से जुड़े नियमों पर रोक लगना इस बात का संकेत है कि यह नियम स्पष्ट नहीं थे और इसके दुरुपयोग की आशंका थी।
कैलाश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने यूजीसी रेगुलेशन लागू करते समय दावा किया था कि यह नियम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार किए गए हैं और इनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा तुरंत स्टे लगाए जाने से केंद्र सरकार के दावों की पोल खुल गई है।
उन्होंने कहा कि देश में समानता और असमानता के बीच की खाई को खत्म करने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, क्योंकि इसी असमानता और सामाजिक भेदभाव के कारण हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुल्ला और पायल जैसे मामलों में युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। यादव ने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत घटनाएं नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम हैं।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि राइट टू इक्विटी और राइट टू इक्वालिटी जैसे सवालों पर खासकर हिंदी क्षेत्र के स्वर्ण समाज में जिस तरह का आक्रोश देखने को मिला, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग के समय जैसी व्यापक प्रतिक्रिया इस बार भले न दिखी हो, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में असमानता से जुड़े मुद्दे ज्यादा तेजी से सामने आ रहे हैं।
कैलाश यादव ने आरोप लगाया कि यूजीसी रेगुलेशन को मौजूदा समय में सामने लाने के पीछे केंद्र सरकार की राजनीतिक मंशा छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, रुपये की गिरती कीमत, मनरेगा, सोना-चांदी के बढ़ते दाम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विषयों को उछाला जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आगामी समय में दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, और इसी को ध्यान में रखकर यूजीसी रेगुलेशन को आगे बढ़ाया गया। यादव के अनुसार, भाजपा और संघ से जुड़े कई वरिष्ठ नेता पहले भी समता संवर्धन से जुड़े प्रावधानों का विरोध करते रहे हैं।
कैलाश यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी रेगुलेशन 2025-26 पर स्टे लगाया जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है। उन्होंने मांग की कि देश में ST, SC, OBC और सामान्य वर्ग के बीच असमानता और भेदभाव को रोकने को लेकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका का रुख स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि “बटोगे तो कटोगे” जैसे बयानों पर भी सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि इस तरह के वक्तव्यों से समाज में भेदभाव और असमानता को बढ़ावा मिलता है।
