RANCHI
सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि हूल और बिरसा उलगुलान की आवाज बुलंद करने वाला आदिवासी समुदाय आज अपनी मान्यता और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। असम विधानसभा चुनाव से पहले इस पोस्ट ने सियासी हलचल पैदा कर दी है। जारी पोस्ट में सोरेन ने कहा है कि
अंग्रेज़ों के सामने नतमस्तक नहीं होने वाले, जल–जंगल–ज़मीन की रक्षा में सदियों तक संघर्ष करने वाले, अपने स्वाभिमान को कभी न बेचने वाले, आदिवासियों को आज अपने ही देश में हक और पहचान के लिए दर-दर की ठोकरें क्यों खानी पड़ रही हैं। यह केवल एक प्रश्न नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र के आईने में दिखती सच्चाई है।
सोरेन ने पूछा है, जिन समुदायों ने औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ सबसे पहले और सबसे निर्णायक लड़ाइयां लड़ीं, चाहे वह संथाल हूल हो या भगवान बिरसा का उलगुलान, आज वही समुदाय अपने ही संविधान के भीतर मान्यता और सम्मान के लिए संघर्षरत हैं। क्या यह विडंबना नहीं है?
झारखंड सीएम ने कहा है, असम की धरती पर एक सच दबा दिया गया है। असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज को आज तक ST का संवैधानिक दर्जा नहीं मिला। यह कोई सामान्य चूक नहीं है यह राष्ट्रीय स्तर का अन्याय है, जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। सोचिए, जिन्हें अंग्रेज़ उनके घरों से दूर ले आए, जिन्होंने अपने खून-पसीने से असम की अर्थव्यवस्था खड़ी की, उन्हीं को उनके अस्तित्व की मान्यता नहीं दी गई। आज़ादी के बाद दशकों तक सरकारें बदली, झंडे बदले, नेतृत्व बदला लेकिन आपकी तकदीर नहीं बदली।
सोरेन ने आगे कहा है, सबसे पीड़ादायक यह है कि जिन्होंने बड़े-बड़े वादे किए, उन्होंने भी इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं बनाया। यहां तक कि सत्ता में बैठी पार्टियों ने इसे अपने घोषणापत्र तक में जगह नहीं दी। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं, यह मुद्दा राजनीति से ऊपर है। यह न्याय, सम्मान और पहचान का सवाल है। जब-जब हमें संघर्ष करना पड़ा है, तीर-धनुष ने ही हमें जज़्बा और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
जेएमएम नेता ने कहा, हम आदिवासियों को हमेशा ही सत्ताधारियों ने मुख्यधारा से अलग रखने की कोशिश की है। हमेशा ही झूठे वादों के चंगुल में हमें फंसाया है। सच तो यह है कि ये लोग हमें कीड़े-मकौड़ों की तरह देखते हैं। इन लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि कि जब एक मामूली चींटी भी हाथी की सूंड में घुस जाती है, तो हाथी बौखला जाता है। यह दमनकारी सरकार एक पागल हाथी है और हम हैं वही मामूली चींटी, जो उस पागल हाथी को पटखनी देने की मादा रखती है। अब वह दिन दूर नहीं, जब असम राज्य में हम आदिवासी संस्कृति, सभ्यता और विरासत के अद्भुत उत्थान को देखेंगे।
सोरेन ने असम जेएमएम के पक्ष में लोगों से वोट की अपील करते हुए कहा, एसटी पहचान के लिए, न्यूनतम 500 रुपये मजदूरी के लिए, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए, बच्चों की बेहतर शिक्षा, आवास और रोजगार के लिए मोर्चा के प्रत्याशियों को समर्थन दें। बिना डरे, बिना बंटे, अपना निशान तीर-धनुष को समर्थन दें। JMM + JBP उम्मीदवार को विजयी बनाइए।
