“मरंग होड़ की चीख” सहित डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो ‘गोतिया’ की 4 कविताएं
मरंग होड़ की चीख : विकास के नाम पर उजड़ता जंगल और लहूलुहान लोकजीवन हमने हाथी को कभी दाँत नहीं…
मरंग होड़ की चीख : विकास के नाम पर उजड़ता जंगल और लहूलुहान लोकजीवन हमने हाथी को कभी दाँत नहीं…