NEW DELHI
पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं शीर्ष अदालत में पेश हुईं और Chief Justice of India जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर केंद्र की भाजपा सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के जरिए पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब असम में भी चुनाव होने हैं, तो वहां वही मापदंड क्यों लागू नहीं किए जा रहे। सुनवाई के दौरान ममता ने भावुक लहजे में कहा, “न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है।”
ममता बनर्जी ने अदालत को बताया कि पिछले चार महीनों में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, लेकिन नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया लगभग रोक दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामों की मामूली त्रुटियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर डिलीशन का आधार बनाया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि SIR के पहले चरण की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं। इसमें युवाओं की असामान्य मौतें, जेंडर बायस और कुछ खास समुदायों के नाम ज्यादा हटाए जाने जैसी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।
मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया की निगरानी के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर की नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। इस पर ECI की ओर से वरिष्ठ वकील ने राज्य सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाया, जिसे ममता बनर्जी के वकील ने सिरे से खारिज किया।
CJI ने सुनवाई के दौरान आधार कार्ड को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आधार की अपनी सीमाएं हैं और नामों की गलत स्पेलिंग जैसी त्रुटियों को चुनाव आयोग को ठीक करना चाहिए। मामले पर अब अगली सुनवाई और फैसला सोमवार को होने की संभावना है।
