RANCHI
झारखंड संयुक्त डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JDLCCE-2023) के माध्यम से चयनित 250 से अधिक जूनियर इंजीनियरों ने सेवा शर्तों में असमानता को लेकर राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। अभियंताओं का आरोप है कि एक ही परीक्षा और एक ही मेरिट लिस्ट से चयन होने के बावजूद नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) में नियुक्त इंजीनियरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
अभियंताओं के अनुसार, यह परीक्षा राज्य के विभिन्न विभागों — सड़क निर्माण विभाग (RCD), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DWSD), जल संसाधन विभाग (WRD) और नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) — के लिए संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी और सभी का चयन एकीकृत मेरिट सूची के आधार पर हुआ।
घटनाक्रम (Chronology of Events)
- JDLCCE-2023 के तहत राज्य स्तरीय संयुक्त परीक्षा आयोजित हुई
- एकीकृत मेरिट सूची से विभिन्न विभागों में जूनियर इंजीनियरों का चयन
- RCD, DWSD और WRD में चयनित अभियंताओं को राज्य अधीनस्थ अभियंत्रण सेवा कैडर मिला
- UDHD में चयनित अभियंताओं को झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग में रखा गया
- भर्ती अधिसूचना में इस संवर्ग का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं
- पदस्थापन के बाद कैडर, सेवा लाभ और वेतन भुगतान को लेकर समस्याएँ शुरू
- UDHD और निदेशालय नगर प्रशासन (DMA) को कई पत्र भेजे गए
- समाधान नहीं होने पर न्यायालय का रुख किया गया
कैडर आवंटन पर आपत्ति
प्रभावित अभियंताओं का कहना है कि भर्ती अधिसूचना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि नगर विकास एवं आवास विभाग में चयनित जूनियर इंजीनियरों को झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग में रखा जाएगा।
इसके विपरीत, अन्य विभागों — RCD, DWSD और WRD — में चयनित अभियंताओं को State Subordinate Engineering Services कैडर प्रदान किया गया है।
नियमित दर्जा नहीं, सेवा लाभों से वंचित
नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलने के कारण अभियंता कई महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित हैं, जिनमें शामिल हैं —
- GPF / OPS
- पेंशन लाभ
- चिकित्सा सुविधाएँ
- सेवा सुरक्षा
- अन्य वैधानिक सरकारी लाभ
वेतन भुगतान बना बड़ी समस्या
झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग के तहत वेतन भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकायों (ULBs / Nagar Nikay) पर निर्भर है। सीमित वित्तीय संसाधनों वाले छोटे नगर निकाय नियमित वेतन भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं।
इसके परिणामस्वरूप कई जूनियर इंजीनियरों का वेतन 6 से 7 महीनों से लंबित है, जिससे उनकी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।
विभाग को कई पत्र, फिर भी कार्रवाई नहीं
अभियंताओं का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) और निदेशालय नगर प्रशासन (DMA) को कई बार लिखित अभ्यावेदन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय या समाधान सामने नहीं आया।
न्यायालय में मामला लंबित
कैडर और सेवा शर्तों से जुड़े इस विवाद को लेकर मामला माननीय उच्च न्यायालय में दायर किया जा चुका है, हालांकि अब तक नियमित सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है।
सरकार से प्रमुख मांगें
- झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग के बजाय राज्य अधीनस्थ अभियंत्रण सेवा में शामिल किया जाए
- नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
- अन्य विभागों के समान सेवा लाभ लागू किए जाएँ
- लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए
अभियंताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेंगे।
