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प्रोन्नति सहित विभिन्न मांगों को लेकर अंचलाधिकारी (CO), राजस्व पदाधिकारी और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन सामूहिक हड़ताल का असर अब व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। राज्य के कई जिलों में अंचल कार्यालयों का कामकाज लगभग पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताली कर्मियों को काम पर लौटने का सख्त अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन जारी रखे हुए हैं, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है।
हड़ताल के कारण दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी सहित भूमि और राजस्व से जुड़े अधिकांश कार्य बाधित हो गए हैं। आम लोगों को जरूरी कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। सरकार द्वारा बनाई गई वैकल्पिक व्यवस्था भी जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा 31 मार्च को कई अधिकारियों को अलग-अलग अंचलों का प्रभार सौंपा गया था। हालांकि, कई अधिकारियों ने यह जिम्मेदारी लेने से ही इंकार कर दिया और हड़ताल का समर्थन करते हुए खुद भी आंदोलन में शामिल हो गए।
लखीसराय अंचल में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी सुक्रांत राहुल को प्रभार दिया गया, लेकिन उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। वहीं, हलसी अंचल की जिम्मेदारी दिए जाने के बावजूद अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अजीत कुमार भी हड़ताल में शामिल हो गए। इन दोनों अंचलों में अब पूर्व की तरह बीडीओ को ही अंचलाधिकारी का कामकाज संभालना पड़ रहा है।
पिपरिया अंचल के राजस्व अधिकारी जैनुल आबेदीन ने हड़ताल में शामिल नहीं होते हुए पिपरिया और सूर्यगढ़ा अंचल का प्रभार संभालकर कामकाज शुरू कर दिया है। बड़हिया अंचल में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी जितेंद्र कुमार चौधरी सीओ का कार्य देख रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए स्पष्ट है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो राजस्व सेवाओं पर असर और गहरा सकता है, जिससे आम लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी।
