राइड-हेलिंग कंपनियों के खिलाफ खुला मोर्चा, किराया नीति और अवैध बाइक टैक्सी पर टकराव तेज
New delhi
देशभर में 7 फरवरी 2026 को शहरी परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े कैब और ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। ड्राइवर यूनियनों का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते यह कदम उठाना पड़ा है।
चालक संगठनों का आरोप है कि अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही है। उनका कहना है कि इन सेवाओं के कारण न केवल उनकी आय प्रभावित हो रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। हाल के कुछ हादसों का हवाला देते हुए यूनियन नेताओं ने दावा किया कि इन सेवाओं में बीमा और मुआवजा संबंधी सुरक्षा पर्याप्त नहीं है।
ड्राइवरों ने ऐप-आधारित कंपनियों पर मनमानी किराया नीतियां लागू करने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बढ़ते कमीशन और घटती इनकम के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई महीनों से ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
पैनिक बटन नियमों को लेकर भी असंतोष सामने आया है। ड्राइवरों का कहना है कि पहले अधिकृत वेंडर्स से डिवाइस लगवाने को कहा गया, बाद में कुछ वेंडर्स को अमान्य घोषित कर दिया गया, जिससे अतिरिक्त खर्च और भ्रम की स्थिति बनी।
इसके अलावा, कई राज्यों में लागू ओपन ऑटो-रिक्शा परमिट नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं। यूनियनों के अनुसार, सड़कों पर ऑटो की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक जाम तो बढ़ा ही है, साथ ही ड्राइवरों की रोजाना कमाई में भी गिरावट आई है।
यदि हड़ताल व्यापक स्तर पर सफल रहती है, तो बड़े शहरों में ऑफिस जाने वाले यात्रियों और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सरकार या कंपनियों की ओर से इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
