नालंदा की ज्ञान-परंपरा से आज की साहित्यिक दुनिया तक; राजगीर में नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का भव्य आगाज़

Rajgir

बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान-परंपरा को समकालीन साहित्यिक विमर्श से जोड़ते हुए नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025 की शुरुआत रविवार को राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर में हुई। पांच दिनों तक चलने वाले इस पहले संस्करण में लेखक, कवि, कलाकार, फिल्मकार और विचारक एक साझा मंच पर जुटे हैं।

नालंदा को विश्व के प्राचीनतम शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने वाली विरासत से प्रेरित यह साहित्य महोत्सव ‘Legacy, Language and Literature’ की अवधारणा पर आधारित है। खास बात यह है कि इस आयोजन में बिहार और नॉर्थ ईस्ट की भाषाओं, लोककथाओं और समकालीन लेखन को विशेष फोकस में रखा गया है।

महोत्सव के दौरान साहित्यिक सत्र, पैनल चर्चा, लेखक संवाद और विचारोत्तेजक कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही पुस्तक स्टॉल, नई पुस्तकों का विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, योग और ध्यान सत्र भी उत्सव का हिस्सा हैं, जो इसे बौद्धिक के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव बनाते हैं।

नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल की फेस्टिवल डायरेक्टर गंगा कुमार ने कहा कि यह आयोजन नालंदा की ज्ञान-परंपरा को समर्पित एक जीवंत प्रयास है, जहां परंपरा और समकालीन विचारों के बीच संवाद स्थापित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्रों में नवा नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह, प्रसिद्ध नृत्यांगना और फेस्टिवल चेयरपर्सन सोनल मानसिंह, लेखक पंकज दुबे, साहित्यकार डॉ. पंकज के. पी. श्रेयस्कर, सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार और कई प्रतिष्ठित वक्ताओं की सहभागिता रही।

आयोजकों का मानना है कि नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल आने वाले वर्षों में एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच के रूप में उभरेगा, जो राजगीर को समकालीन बौद्धिक और सांस्कृतिक संवाद के केंद्र में स्थापित करेगा।

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