रांची में कुड़मी समाज की हुंकार, STदर्जा और कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

प्रभात तारा मैदान में उमड़ा जनसैलाब, ऐतिहासिक अन्याय खत्म करने की हुंकार



RANCHI  

रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले आयोजित कुड़मी अधिकार महारैली में राज्यभर से हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा जुटे।

रैली में कुड़मी-कुरमी (महतो) समुदाय को ओबीसी की बजाय अनुसूचित जनजाति में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान देने की मांग प्रमुख रही। वक्ताओं ने दावा किया कि 1931 की जनगणना से पहले झारखंड क्षेत्र में कुड़मी समुदाय एसटी सूची में शामिल था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया।

समिति के मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने कहा कि यह जनसैलाब समाज की जागरूकता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि खान-पान, रहन-सहन, पर्व-त्योहार और भाषा आदिवासी समुदाय से मेल खाते हैं, फिर भी एसटी दर्जा नहीं दिया गया। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।

वहीं शिक्षाविद और रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ. अमर चौधरी ने कहा कि समाज लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से अधिकार मांगता रहा है। जरूरत पड़ने पर आंदोलन दिल्ली तक ले जाने की बात भी कही गई।

रैली ऐसे समय में हुई जब कुछ आदिवासी संगठनों की ओर से इस मांग का विरोध भी जताया गया है। कुड़मी नेताओं ने इसे अपने अधिकारों की लड़ाई बताते हुए आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। 18 संगठनों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस महारैली ने झारखंड की राजनीति में इस मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है।

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