शहादत दिवस विशेष: जब कामरेड महेंद्र सिंह ने SP, गिरिडीह से कहा, तो तुम्हें भी ज़िंदा…

BIKASH SINGH, BERMO

अपरिमेय प्रतिभा, प्रचंड वाग्मिता और अप्रतिहत कर्मशक्ति के प्रतीक कामरेड महेंद्र सिंह एक लीजेंड थे। आज की राजनीति के पतन के दौर में समय की मांग है कि आने वाली पीढ़ी जाने कि ऐसा भी एक विधायक हुआ था, जो गरीबों के सम्मान के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाने से भी पीछे नहीं हटता था।

यह घटना बगोदर थाना क्षेत्र के दामा गांव की है। गांव के ही एक चौकीदार ने आधी रात एक गरीब हरिजन विधवा महिला के घर में गलत नीयत से घुसने की कोशिश की। कमजोर और अकेली महिला ने अपनी आबरू बचाने के लिए जलती हुई ढिबरी (Kerosene Lamp) चौकीदार पर फेंक दी। ढिबरी की लौ और केरोसिन तेल चौकीदार के लिए प्राणघातक साबित हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद उस महिला के खिलाफ IPC की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया और प्रशासन का तांडव शुरू हो गया। दामा और आसपास के गांवों में भाकपा (माले) के समर्थक बड़ी संख्या में थे, जो अन्याय और प्रशासनिक दमन के खिलाफ मजबूती से खड़े हो गए। पुलिस कई बार महिला को गिरफ्तार करने पहुंची, लेकिन जनप्रतिरोध के कारण हर बार असफल रही।

उस समय गिरिडीह के एसपी सुप्रभात दास थे, जिनका स्वभाव बेहद जनविरोधी और उद्दंड माना जाता था। जब स्थानीय प्रशासन महिला को गिरफ्तार करने में विफल रहा, तो वे खुद भारी पुलिस बल के साथ आधी रात दामा पहुंचे और महिला को गिरफ्तार कर लिया।

कामरेड महेंद्र सिंह के नेतृत्व में हम लोगों ने एसपी से मुलाकात की और कहा कि महिला ने जो किया वह आत्मरक्षा में किया, इसलिए उसे रिहा किया जाए। लेकिन एसपी किसी भी तर्क को सुनने को तैयार नहीं थे। उनके अनुसार चौकीदार प्रशासन का अंग था और यह एक हत्या थी।

महिला को न्याय दिलाने के लिए बगोदर में आमसभा का आयोजन किया गया। प्रशासन ने इस सभा को विफल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। सभा से दो-तीन दिन पहले ही पुलिस का फ्लैग मार्च शुरू हो गया, सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई और पूरे इलाके में आतंक का माहौल बना दिया गया।

लेकिन प्रशासन ने महेंद्र सिंह और उनकी पार्टी का गलत आकलन किया। सभा के दिन इतनी विशाल भीड़ उमड़ पड़ी कि सारी बैरिकेडिंग ध्वस्त हो गई। आक्रामक प्रशासन अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गया। इसके बावजूद एसपी सभा की सफलता को अपनी तौहीन मान रहे थे।

क्षेत्र के डीआईजी के.बी. सिंह ने महेंद्र सिंह से विधि-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। इस पर महेंद्र सिंह ने कहा कि जब गरीबों के साथ अन्याय होगा, तो हमारी प्राथमिकता न्याय का राज स्थापित करना होगी, न कि केवल विधि-व्यवस्था की चिंता करना।

इसी दौरान एसपी ने तंज कसते हुए कहा, “आप लोग तो एक हत्यारे के पक्ष में हैं।”
तभी महेंद्र सिंह गरज पड़े, “मिस्टर एसपी, अगर आप भी किसी महिला के सम्मान के साथ खिलवाड़ करेंगे, तो मैं आपके ऊपर भी केरोसिन डालकर ज़िंदा जला दूँगा।”

यह सुनकर पूरा माहौल सन्न रह गया। एसपी की बोलती बंद हो गई। वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते थे, क्योंकि जनसैलाब के सामने प्रशासन पूरी तरह डिफेंसिव हो चुका था। महेंद्र सिंह का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि ईमानदार अधिकारी उनके सामने सम्मान से पेश आते थे और भ्रष्ट अधिकारी दूरी बना लेते थे।

सभा सफल रही। डीआईजी के.बी. सिंह ने स्वयं पूरे मामले को देखने का आश्वासन दिया और अंततः उस गरीब महिला को न्याय मिला।

उस सभा में बेरमो से भी 7–8 ट्रक भरकर हम लोग पहुंचे थे। उस समय बेरमो गिरिडीह जिले का ही हिस्सा था, और सबसे पहले बैरिकेडिंग तोड़ने वालों में हम ही लोग थे।

(महेंद्र सिंह के पैतृक गांव खंभरा, बगोदर में 16 जनवरी को उनका शहादत दिवस हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2005 में इसी दिन नक्सलियों ने गोलियों से छलनी कर उनकी हत्या कर दी थी)

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