बीजेपी सरकार में कूकी विधायकों की एंट्री से मणिपुर में फैली हिंसा, डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन से मांगा इस्तीफा



पहाड़ी जिलों में भड़का गुस्सा: Kuki-Zo विधायकों के सरकार में शामिल होने पर उग्र प्रदर्शन, डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन के पुतले फूंके, इस्तीफे की मांग तेज; अलग प्रशासन की फिर उठी मांग

Manipur

मणिपुर के पहाड़ी जिलों में शुक्रवार को उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए जब हजारों लोगों ने तीन Kuki-Zo विधायकों के राज्य सरकार में शामिल होने के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन समेत दो अन्य विधायकों — एलएम खौटे और एन सनाते — के पुतले फूंके और इस्तीफे की मांग की।

चुराचांदपुर जिले में Kuki Women Organisation for Human Rights और Indigenous Tribal Leaders Forum (ITLF) के महिला विंग के संयुक्त तत्वावधान में एक बड़ी रैली निकाली गई। मार्च कोइते प्लेग्राउंड से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय करते हुए ‘वॉल ऑफ रिमेंबरेंस’ तक पहुंचा।

रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “We don’t want a popular government” और “Don’t play with our blood” जैसे नारे लगाए। साथ ही ‘Separate Administration’ की मांग को भी दोहराया गया। आरोप लगाया गया कि संबंधित विधायकों ने सरकार में शामिल होकर जनता की उम्मीदों के साथ “विश्वासघात” किया है। खास तौर पर नेमचा किपगेन के डिप्टी सीएम बनाए जाने पर नाराजगी ज्यादा दिखी।

कांगपोकपी जिले के सैकुल और तेंगनौपाल जिले के मोरेह कस्बे में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए। यहां भी तीनों विधायकों के पुतले जलाए गए और किपगेन के इस्तीफे की मांग उठी।

कुकी बहुल इलाकों में 24 घंटे के बंद को रैली के लिए अस्थायी रूप से ढील दी गई थी। प्रदर्शन के मद्देनजर चुराचांदपुर, कांगपोकपी और फर्जावल जिलों में संबंधित विधायकों के आवासों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

उधर, मणिपुर के मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने इम्फाल में पत्रकारों से कहा कि चुराचांदपुर में कुछ व्यवधान जरूर हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने माना कि लोगों में नाराजगी है, हालांकि बड़ी संख्या में लोग शांति और सामान्य स्थिति की वापसी चाहते हैं। सरकार का दावा है कि हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।

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