6 साल से बिना अध्यक्ष के झारखंड महिला आयोग, 4000 से अधिक मामलों को न्याय का इंतजार

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उठा बड़ा सवाल, बिना आयोग के कैसे मिलेगा महिलाओं को न्याय


RANCHI

आज International Women’s Day के अवसर पर पूरे देश सहित झारखंड में महिलाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है। लेकिन इस माहौल के बीच झारखंड की महिलाओं में एक कसक भी देखने को मिल रही है—राज्य महिला आयोग में पिछले छह वर्षों से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं।

जानकारी के अनुसार Kalyani Sharan का कार्यकाल 6 जून 2020 को समाप्त हो गया था। उसके बाद से अब तक झारखंड राज्य महिला आयोग में न तो नए अध्यक्ष की नियुक्ति हुई और न ही सदस्यों की। आयोग में अध्यक्ष नहीं होने से उसके अधिकांश कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 7 जून 2020 से 31 जनवरी 2026 के बीच महिला आयोग में कुल 4014 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। आयोग का गठन नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है और पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

सरकार भले ही विभागीय कार्रवाई का दावा करती रही हो, लेकिन पीड़ित महिलाओं के लिए समर्पित मंच और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था पिछले छह वर्षों से ठप पड़ी हुई है।

झारखंड राज्य महिला आयोग में एक अध्यक्ष और पांच सदस्यों के पद स्वीकृत हैं। सभी पद खाली होने के कारण फिलहाल केवल शिकायतें दर्ज कर फाइलों में रख दी जाती हैं और उन पर आगे की कार्रवाई नहीं हो पाती।

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