दस सदस्यीय टीम: पंचायतों के अधिकार और भूमिका होगी और मजबूत
Ranchi
25 साल पुराने पंचायती राज अधिनियम को संशोधित करेगी सरकार, राज्य स्तरीय समिति गठित, तीन महीने में कमेटी देगी रिपोर्ट, उसके अनुरूप संशोधन और नियमावलियों का होगा गठन
राज्य सरकार ने 25 साल पुराने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन का फैसला किया है। इस अधिनियम का गठन 2001 में हुआ था। उसके बाद समय समय पर जरुरत के अनुरूप कुछ नियमावलियों का गठन किया गया, लेकिन समेकित रूप से इस नियमावलियों का गठन नहीं किया जा सका। मसलन मुखिया के नहीं रहने पर उप मुखिया को पंचायत की जिम्मेदारी होगी। लेकिन उप मुखिया का चुनाव कैसे होगा, स्पष्ट नहीं है। इसी तरह वित्त आयोग ने अब वैसे पंचायतों को विशेष सहायता का प्रावधान किया है, जो अपना भी संसाधन सृजित कर रहे हैं। इस तरह कई तरह की तकनीकी समस्याएं और नयी जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने पंचायती राज अधिनियम 2001 में संशोधन करने के लिए राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया है। हालांकि इस संशोधन का असर पेसा एक्ट और उसकी नियमावली पर भी पड़ेगी। संशोधित पंचायती राज अधिनियम के अनुरूप पेसा एक्ट और उसकी बहुचर्चित नियमावली को संशोधित की जाएगी।
राज्य स्तरीय कमेटी में कौन कौन
राज्य स्तरीय समिति में झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा के अलावा पंचायत राज निदेशालय के निदेशक, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी विनोद किस्पोट्टा, डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण रिसर्च इंस्टीट्यूट के उपनिदेशक, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा नामित प्रतिनिधि, विधि विभाग द्वारा नामित प्रतिनिधि, दो पेसा जिलों के उप विकास आयुक्त, रिटायर्ड जिला पंचायती राज पदाधिकारी प्रेमतोष चौबे, पंचायत राज निदेशालय के सलाहकार सज्जाद मजीद और शैलेन्द्र कुमार सिंह, राज्य पेसा समन्वयक सुधीर कुमार पाल, राज्य की जानी-मानी वकील रश्मि कात्यायन, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रामचन्द्र उरांव और आदिवासी मामलों की जानकार दयामनी बारला को शामिल किया गया है.
पंचायत राज निदेशालय के अधिकारी, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि, विधि विशेषज्ञ, पंचायत व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और सामाजिक क्षेत्र के जानकारों को भी समिति में जगह दी गई है।
इस बहु-आयामी टीम का उद्देश्य पंचायत व्यवस्था से जुड़े हर पहलू को समझते हुए व्यापक सुझाव तैयार करना है, ताकि जमीनी स्तर पर शासन प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सके।
तीन महीने में रिपोर्ट, संशोधन का मसौदा भी तैयार होगा
समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया गया है। इसका मुख्य कार्य अधिनियम के प्रावधानों की वर्तमान जरूरतों के अनुसार समीक्षा करना और ग्राम सभा तथा त्रिस्तरीय पंचायतों की भूमिका, अधिकार और जिम्मेदारियों को और स्पष्ट व मजबूत बनाने के सुझाव देना है।
इसके साथ ही खनिज संसाधनों, लघु वनोपज, भूमि अधिग्रहण और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधानों की प्रासंगिकता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
समिति को आवश्यक संशोधनों के लिए विधेयक का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। विभागीय आदेश के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट के साथ संशोधन का मसौदा सरकार को सौंपना होगा।
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि झारखंड में पंचायतों को अधिक अधिकार, स्पष्ट जिम्मेदारियां और बेहतर प्रशासनिक ढांचा मिल सकेगा, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।
