साहित्यकारों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी और जनवाद पर जताई चिंता, कवि सम्मेलन से समापन
RANCHI
22 फरवरी को रांची के महात्मा गांधी मार्ग स्थित सफदर हाशमी सभागार में जनवादी लेखक संघ (जलेस) का 45वां स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के तहत साम्राज्यवाद विरोधी दिवस और डॉ किरण के कहानी संग्रह ‘वंश वृक्ष’ का लोकार्पण सह कृति चर्चा आयोजित की गई।
वैचारिक सत्र में उठे समकालीन मुद्दे
पहले सत्र में डॉ नीरज सिंह, रनेंद्र कुमार, पंकज मित्र, कुमार बृजेंद्र और एम जेड ख़ान ने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव है और समाज को धर्म व जाति के आधार पर बांटने की प्रवृत्ति बढ़ी है। न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी चिंता जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में नॉर्वे और यूके जैसे देशों का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक जीवन में नैतिकता की जरूरत पर जोर दिया गया। वेनेजुएला पर हमलों और वैश्विक ट्रेड वार को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।

जलेस के 45 साल और ‘वंश वृक्ष’ का लोकार्पण
वक्ताओं ने बताया कि 13-14 फरवरी 1982 को दिल्ली में करीब 600 हिंदी-उर्दू लेखकों ने जनवादी लेखक संघ का गठन किया था, ताकि आम जनता की आवाज साहित्य के माध्यम से उठाई जा सके।
डॉ किरण के कहानी संग्रह ‘वंश वृक्ष’ का लोकार्पण डॉ नीरज सिंह, रनेंद्र कुमार, पंकज मित्र, कुमार बृजेंद्र, वीना श्रीवास्तव, यास्मीन लाल और एम जेड ख़ान ने संयुक्त रूप से किया। पुस्तक पर वीना श्रीवास्तव, श्रीनिवास, जेब अख्तर, डॉ अली और कुमार बृजेंद्र ने समीक्षा प्रस्तुत की। जलेस की ओर से डॉ किरण को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन और मुशायरा
कार्यक्रम के अंत में कवि सम्मेलन और मुशायरा आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता उर्दू के डॉ महफूज आलम, हिंदी के कुमार बृजेंद्र और नागपुरी के मोईज उद्दीन मिरदाहा ने की। इकबाल हुसैन, रामदेव बड़ाइक, विक्की मिंज, सुकेशी कर्मकार, डॉ किरण, मंजूर अहमद, सुधीर साहू, यास्मीन लाल और अन्य कवियों ने कविता पाठ किया।
कार्यक्रम में दीनानाथ, भारती, स्वाति, मो. अमान, फिरदौस जहां, अपूर्वा, इबरार अहमद, हफीजुर्रहमान, एलिना होरो, जयंत पांडे और अन्य साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

