महिलाओं की आजादी और सम्मान पर विमर्श, रांची में कवि सम्मेलन व मुशायरा
RANCHI
राजधानी रांची के सफदर हाशमी सभागार में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर “महिलाओं की आजादी का महत्व” विषय पर विशेष चर्चा आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण पर विस्तार से विचार रखे गए। कार्यक्रम के दौरान कवि सम्मेलन सह मुशायरा का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अपराजिता मिश्रा के स्वागत भाषण से हुई। समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. करुणा झा ने महिलाओं के सर्वांगीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव समाज में स्त्री और पुरुष दोनों की समान भागीदारी ही समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. किरण ने कहा कि महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। वहीं डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि महिला से जुड़ी समस्याएं केवल किसी एक देश की नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की चुनौती हैं। उन्होंने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाली हिंसा की घटनाओं की कड़ी निंदा की।
कार्यक्रम में अमल आजाद ने पितृसत्तात्मक सोच को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि श्रीनिवास ने कहा कि समानता का वातावरण सबसे पहले परिवार से ही शुरू होना चाहिए। इसके अलावा डॉ. विनोद कुमार, कुमार बृजेन्द्र, इकबाल खान, एम. जेड. खान, सीमा प्रसाद, निशि प्रभा, यास्मीन लाल और अपराजिता मिश्रा सहित कई वक्ताओं ने महिलाओं की आजादी और सम्मान पर अपने विचार साझा किए।
इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन और मुशायरा में कई कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, समानता और सामाजिक बदलाव के संदेश दिए। कार्यक्रम की शुरुआत नजमा नाहिद अंसारी की कविता से हुई, जबकि रेहाना ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावुक कर दिया।
निगार सुल्ताना ने दहेज प्रथा पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की, वहीं डॉ. शाहीन सबा ने “मत समझिए कि मैं औरत हूं” शीर्षक कविता के माध्यम से महिलाओं की शक्ति को उजागर किया। डॉ. इकबाल खान ने अपने शेरों से कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया।
कार्यक्रम में हिंदी और उर्दू के साथ-साथ झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में भी काव्य पाठ हुआ। छोटनी कुमारी ने असुरी भाषा में गीत और कविता सुनाई। इसके अलावा यास्मीन लाल, किरण कच्छप, मोईजुद्दीन मिरदाहा और रामदेव बड़ाईक ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बनाया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और समाज में समानता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में डॉ. मृदुला शुक्ला, मोहम्मद अमान, आसमा खातून, इस्लाम, असद खान, इज़ान खान और सुनीता केरकेट्टा सहित कई लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आलम आरा ने किया, जबकि अंत में अपराजिता मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।
