पाकुड़ में किसान को 8 साल बाद भी नहीं मिला अधिग्रहित जमीन का मुआवजा, सड़क पर परिवार

 

PAKUD


सड़क चौड़ीकरण और उन्नयन कार्य के लिए अधिगृहित की गई रैयती जमीन का मुआवजा आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्राम चंडालमारा निवासी किसान गणेश मंडल ने उपायुक्त पाकुड़ को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

आवेदन के अनुसार, मौजा चंडालमारा, थाना संख्या-19, जमाबंदी संख्या-24, दाग संख्या-139 की कुल 70 डिस्मिल (0.70 एकड़) रैयती पैतृक भूमि को पथ निर्माण विभाग द्वारा सड़क चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए स्थायी रूप से अधिग्रहित किया गया था।

दिनांक 20 अगस्त 2018 को महेशपुर अंचल कार्यालय द्वारा आमीन नापी कर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई थी। नापी के दौरान भूमि का रकबा 6 बीघा 17 कट्ठा 19 घूर के अंतर्गत अंश रकबा 02 बीघा 02 कट्ठा 07 घूर बताया गया, जो सड़क निर्माण के लिए लिया गया।

भू-अर्जन पदाधिकारी को भेजा गया था पत्र

अंचल कार्यालय महेशपुर की ओर से पत्रांक 855/रा०, प्रेषक अंचल अधिकारी महेशपुर द्वारा जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ को संबंधित दस्तावेज और प्रस्ताव भेजा गया था, जिसकी प्रति भी आवेदन के साथ संलग्न है। इसके बावजूद अब तक मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

गरीब किसान की आजीविका पर असर

किसान गणेश मंडल ने अपने आवेदन में कहा है कि अधिग्रहित भूमि उनकी पैतृक रैयती जमीन है और मुआवजा नहीं मिलने से उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे गरीब किसान के साथ अन्याय बताते हुए उपायुक्त से सहानुभूतिपूर्वक हस्तक्षेप करने की मांग की है।

प्रशासन से शीघ्र भुगतान की मांग

पीड़ित किसान ने उपायुक्त से अनुरोध किया है कि वे अपने स्तर से मामले की समीक्षा कर अधिग्रहित भूमि का मुआवजा शीघ्र भुगतान कराने का निर्देश दें, ताकि वर्षों से लंबित इस समस्या का समाधान हो सके।

यह मामला एक बार फिर भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा भुगतान में हो रही देरी और प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है, जिससे ग्रामीण और किसान वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

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