Tehran/New Delhi
मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव के बीच ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए भारत सहित पांच “मित्र देशों” को होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के गुजरने की अनुमति दे दी है। यह जानकारी ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दी। इस फैसले से भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों के लिए समुद्री व्यापार में बड़ी राहत मिली है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन इसी रास्ते से होता है। हाल में ईरान द्वारा इस मार्ग को अवरुद्ध किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था।
ईरान ने इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन को दिए बयान में स्पष्ट किया है कि केवल “नॉन-होस्टाइल” जहाजों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। शर्त यह है कि ऐसे जहाज ईरान के खिलाफ किसी आक्रामक कार्रवाई में शामिल न हों और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करें। सक्षम अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर ही जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिलेगी।
इस फैसले के बाद होर्मुज क्षेत्र में मौजूद करीब 20 भारतीय जहाजों के लिए स्थिति आसान हो गई है। इससे पहले दो भारतीय एलपीजी टैंकर सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, जिन पर करीब 60 भारतीय नाविक सवार थे।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान दोनों पर वैश्विक दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रति अचानक नरमी दिखाने के पीछे भी इसी समुद्री संकट को अहम वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और कूटनीतिक समीकरणों पर गहरा असर डाल रहा है।
