Middle East War के बीच पाक ने संभाली शांति की कमान, मिस्र और तुर्किये संग बड़ी बैठक


Islamabad/Tehran

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। यह बैठक प्रस्तावित चार-पक्षीय शिखर सम्मेलन से पहले हुई, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल होने वाला है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोकने और शांति स्थापित करने के रास्ते तलाशना रहा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाट्टी और तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान के साथ विस्तार से बातचीत की। इस दौरान सभी देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और हालात को नियंत्रित करने के लिए संयम, तनाव कम करने (डी-एस्केलेशन) और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। पाकिस्तान और मिस्र के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की भी समीक्षा की गई और हाल के उच्चस्तरीय दौरों से उत्पन्न सकारात्मक माहौल पर संतोष व्यक्त किया गया।

यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और कई देशों की सीधी या अप्रत्यक्ष भागीदारी से संघर्ष और जटिल होता जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ हालिया बातचीत में क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय शक्तियां समाधान की दिशा में सक्रिय हैं।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका पर गंभीर और सीधे आरोप लगाए हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से शांति वार्ता और कूटनीति की बात करता है, लेकिन पर्दे के पीछे जमीनी हमले (ग्राउंड अटैक) की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे “दोहरे चरित्र” की नीति बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम से युद्ध और व्यापक हो सकता है। ईरान के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा कर दी है।

संघर्ष के सैन्य पहलू भी लगातार तीखे होते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित दुनिया के बड़े एल्यूमिनियम उत्पादन संयंत्रों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान का दावा है कि ये ठिकाने अमेरिकी सैन्य नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इसके जवाब में इजरायल ने कहा कि उसके क्षेत्रों पर ईरान की ओर से एक नई मिसाइल लहर दागी गई है।

इसके अलावा, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिनमें बंदरगाह और सैन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरान के एक महत्वपूर्ण पोर्ट शहर पर हमले की भी खबर है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यह क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

यमन के हूती विद्रोहियों की सक्रियता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हूती समूह ने इजरायल की ओर मिसाइल हमले किए हैं, जिसके बाद इजरायल और अमेरिका ने मिलकर जवाबी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। रेड सी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में शिपिंग मार्गों पर खतरा बढ़ गया है, जहां से दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार का आवागमन होता है।

इस पूरे संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने का खतरा है, उर्वरकों की कमी हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ रहा है। अब तक इस युद्ध में 3000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जो इसकी भयावहता को दर्शाता है।

भारत भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह चुनौतीपूर्ण समय है और सभी को एकजुट होकर इसका सामना करना होगा। साथ ही उन्होंने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की मदद के लिए वहां की सरकारों का आभार भी जताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और सामरिक स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा।

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