ट्राइबल सब प्लान फंड विचलन पर भी सरकार से जवाब तलब
RANCHI
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने एचईसी विस्थापितों को बसाए गए गांवों की जमीन की कथित अवैध बिक्री और निबंधन का गंभीर मामला सदन में उठाया। उन्होंने लटमा, आनी, मसियातू, धुर्वा, तुधुल और अरगो सहित कई गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि दलालों द्वारा जमीन की दोबारा बिक्री कराई जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और असमंजस की स्थिति है।
क्या है जमीन विवाद का मामला
विधायक ने बताया कि वर्ष 1957 से 1960 के बीच हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के कारखाने के लिए 23 गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए नए गांव बसाए गए और प्रत्येक परिवार को 10 से 20 डिसमिल जमीन दी गई। इसके बदले 368 रुपये सरकार को जमा कराए गए थे। लोगों ने अपने खर्च से मकान बनाए, लेकिन आज तक रजिस्टर-2 में नाम दर्ज नहीं होने से उन्हें मालिकाना हक नहीं मिल सका।
आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर जमीन के पूर्व मालिक दोबारा बिक्री और निबंधन करा रहे हैं। विधायक ने यह भी कहा कि जहां पहले से मकान बने हुए हैं, वहां भी पुनः निबंधन हो रहा है। साथ ही एनआईसी पोर्टल में अनियमितता और अंचल अभिलेख में दर्ज नहीं जमीनों की लगान रसीद जारी होने का मुद्दा भी उठाया गया।
मामले पर जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने इसे संवेदनशील बताते हुए तीन महीने के भीतर उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने की बात कही। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
ट्राइबल सब प्लान फंड का मुद्दा भी उठा
सत्र के दौरान विधायक राजेश कच्छप ने ट्राइबल सब प्लान फंड के विचलन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य अपने बजट से इस मद में राशि दे रहा है और फंड विचलन के मामलों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है।
इस पर मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि केंद्र से यह फंड आबादी के अनुपात में राज्य को प्राप्त होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में अब तक फंड के उपयोग और विचलन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना आवश्यक है और सरकार इस दिशा में कार्य करेगी। पूरक प्रश्न में विधायक ने पूछा कि अब तक हुए फंड विचलन में कौन अधिकारी दोषी हैं और क्या उन पर कार्रवाई होगी। इस पर मंत्री ने कहा कि पूरे मामले का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
दोनों मुद्दों पर सरकार की ओर से जांच और दिशा-निर्देश बनाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन विपक्ष ने मामले की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
