संताली साहित्य को नई विरासत, डॉ. बासुदेव बेसरा की अंतिम कृति बनी ऐतिहासिक धरोहर

मांझी परगना सरदार महासभा ने राज्यपाल से की भेंट, “लिटा गोसाईं” महाकाव्य का भव्य विमोचन

JAMTARA

मांझी परगना सरदार महासभा के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल Santosh Gangwar से रांची स्थित लोकभवन में शिष्टाचार मुलाकात की।

इस अवसर पर संताली साहित्यकार, भाषाविद, अधिवक्ता एवं पेसा एक्ट के जन्मदाता Dr. Basudev Besra की अनुपम कृति “लिटा गोसाईं” महाकाव्य का विमोचन राज्यपाल के करकमलों द्वारा किया गया।

बताया गया कि यह डॉ. बेसरा की अंतिम रचना है, जिसे उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में लिखा था। महाकाव्य में संतालों के जीवन-दर्शन के आधार पर पृथ्वी और मनुष्य की उत्पत्ति का विस्तृत एवं रोचक वर्णन किया गया है। संताली भाषा और साहित्य के लिए इसे एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जा रहा है।

शोध और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण

संताल समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह कृति न केवल सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करेगी, बल्कि संताल जीवन और परंपराओं पर शोध करने वालों के लिए भी उपयोगी साबित होगी।

कार्यक्रम में महासभा के संरक्षक एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुनील कुमार बास्की, जिला अध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा, लॉ बिर बैसी मांझी हराधन मुर्मू, समाजसेवी सर्जन हांसदा, मांझी बाबा मिशिल मुर्मू (दुमका), नाज़िर सोरेन, डॉ. सोरेन, सज्जन कुमार मुर्मू, नाईकी बाबा संजीत हेमब्रम तथा कमलदेव मरांडी सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को संताल समाज की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी और उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।

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