कौन था जेफ्री एपस्टीन, जिसकी 68 नई तस्वीरों ने खोले सत्ता और रसूख के कनेक्शन

ताकतवर नाम, गहरे रिश्ते और दबा सच: एपस्टीन की तस्वीरों ने बढ़ाई सियासी बेचैनी

G MISHRA

अमेरिका की राजनीति और सत्ता प्रतिष्ठान एक बार फिर जेफ्री एपस्टीन के नाम से हिलते नजर आ रहे हैं। गुरुवार को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के डेमोक्रेट सदस्यों ने दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की संपत्ति से बरामद 68 नई तस्वीरें सार्वजनिक कीं। इन तस्वीरों का मकसद एपस्टीन के प्रभावशाली सामाजिक और राजनीतिक संपर्कों को उजागर करना बताया गया है। माना जाता है कि इन्हीं रसूखदार रिश्तों के चलते वह दशकों तक कानून की पकड़ से बाहर रहा।

ये तस्वीरें हाउस ओवरसाइट कमेटी के पास मौजूद उस विशाल संग्रह का हिस्सा हैं, जिसमें करीब 95 हजार तस्वीरें शामिल हैं। यह सामग्री 2019 में एपस्टीन की जेल में मौत से पहले जब्त की गई थी। डेमोक्रेट सांसदों ने यह स्पष्ट किया है कि तस्वीरों में दिख रहे लोगों पर किसी अपराध का आरोप नहीं लगाया जा रहा, लेकिन ये तस्वीरें यह जरूर बताती हैं कि एपस्टीन की पहुंच कितनी ऊंचे स्तर तक थी।

जारी की गई तस्वीरों में एपस्टीन कई बड़े नामों के साथ सामाजिक आयोजनों में नजर आता है। इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स, फिल्ममेकर वुडी एलन, गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन, लेखक और दार्शनिक नोम चॉम्स्की और पूर्व ट्रंप सलाहकार स्टीव बैनन शामिल हैं। कुछ तस्वीरों में बिल गेट्स महिलाओं के साथ दिखाई देते हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

इसी बैच में न्यूयॉर्क टाइम्स के कॉलमनिस्ट डेविड ब्रूक्स भी एक तस्वीर में दिखे, जिसके बाद अखबार को सफाई जारी करनी पड़ी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि ब्रूक्स ने 2011 में एक सार्वजनिक डिनर में हिस्सा लिया था, जहां वह अपने कॉलम के लिए जानकारी जुटा रहे थे। अखबार के मुताबिक, उस डिनर से पहले या बाद में ब्रूक्स का एपस्टीन से कोई निजी संपर्क नहीं रहा। यह सफाई इस बात का संकेत है कि जैसे-जैसे एपस्टीन फाइल्स खुल रही हैं, वैसे-वैसे संस्थानों और सार्वजनिक हस्तियों पर दबाव बढ़ रहा है।

तस्वीरों में कुछ बेहद परेशान करने वाले दृश्य भी सामने आए हैं। कई तस्वीरों में एक महिला के शरीर पर रूसी-अमेरिकी लेखक व्लादिमीर नाबोकोव के उपन्यास ‘लोलिटा’ के अंश लिखे दिखाई देते हैं। कुछ तस्वीरों में किताब की प्रति भी बैकग्राउंड में नजर आती है। संभावित पीड़ितों की सुरक्षा को देखते हुए चेहरों को ब्लर किया गया है। इन तस्वीरों को एपस्टीन की मानसिकता और उसके अपराधों की प्रकृति को समझने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

तस्वीरों के अलावा जब्त सामग्री में कई देशों के पासपोर्ट, वीजा और पहचान पत्र भी मिले हैं, जिनमें रूस, यूक्रेन, दक्षिण अफ्रीका और लिथुआनिया के दस्तावेज शामिल हैं। साथ ही टेक्स्ट मैसेज के स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें लड़कियां भेजने और प्रति लड़की एक हजार डॉलर की कीमत तय करने की बात कही गई है। इन संदेशों में रूस की एक 18 वर्षीय लड़की का जिक्र भी है। इसके अलावा वास्तुशिल्प ब्लूप्रिंट, दवाइयों और महिलाओं की कई तस्वीरें भी जब्त सामग्री का हिस्सा हैं।

इन खुलासों का समय भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिकी न्याय विभाग को एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले जारी तस्वीरों में डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू भी नजर आ चुके हैं। प्रिंस एंड्रयू को एपस्टीन से संबंधों के चलते इस साल की शुरुआत में शाही उपाधियों से वंचित किया गया था।

जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी करोड़पति फाइनेंसर था, जिस पर पहली बार 2005 में नाबालिग लड़की के यौन शोषण का आरोप लगा। इसके बावजूद 2008 में उसे बेहद हल्की सजा मिली। 2019 में नाबालिगों की सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में उसकी दोबारा गिरफ्तारी हुई, लेकिन मुकदमे से पहले ही न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, हालांकि परिस्थितियों ने कई सवाल खड़े किए। उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में दोषी ठहराया गया और 20 साल की सजा सुनाई गई।

अब जैसे-जैसे एपस्टीन फाइल्स सार्वजनिक हो रही हैं, यह मामला सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं रह गया है। यह सत्ता, पैसा और न्याय व्यवस्था की कमजोरियों पर सीधा सवाल बन चुका है।

Dehind | पर्दे के पीछे की कहानी

जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरों और दस्तावेजों को सामने लाने का मकसद किसी एक व्यक्ति को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि कैसे सत्ता, पैसा और रसूख मिलकर वर्षों तक एक यौन अपराधी को संरक्षण देते रहे। इन फाइलों के खुलने से अमेरिकी राजनीति, न्याय प्रणाली और जांच एजेंसियों की भूमिका पर नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं। यह मामला अब व्यक्तिगत अपराध से आगे बढ़कर सिस्टम की जवाबदेही और पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई बन चुका है।

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