पुलिस पर उठे गंभीर सवाल, जांच में लापरवाही और आरोपी को फायदा पहुंचाने के आरोप में बड़ी कार्रवाई
BOKARO
बोकारो के पिण्ड्राजोरा थाना क्षेत्र का यह मामला शुरुआत में एक अपहरण केस के रूप में सामने आया था। 24 जुलाई 2025 को रेखा देवी ने अपनी 18 वर्षीय बेटी पुष्पा महतो के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 4 अगस्त को अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, लेकिन शुरुआती जांच में ही कई गंभीर खामियां सामने आने लगीं।
जांच पर उठे सवाल, आरोपी को फायदा पहुंचाने के आरोप
मामले की जांच के लिए बनाई गई SIT टीम के निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया गया। आरोप है कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने ऐसे कदम उठाए, जिससे केस कमजोर हुआ और आरोपी को फायदा मिला। अधिकारियों को जांच प्रक्रिया में लापरवाही ही नहीं, बल्कि जानबूझकर ढिलाई बरतने के संकेत भी मिले।
नई टीम आई, एक दिन में खुल गया राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक आलोक रंजन के नेतृत्व में नई टीम गठित की गई। इस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज एक दिन में पूरे मामले का खुलासा कर दिया।
आरोपी को गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर पुष्पा के कंकाल अवशेष, पहने हुए कपड़े और हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद किया गया।
मिलीभगत, पैसे और पार्टी के आरोप
जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जानकारी मिली कि थाना स्तर पर न सिर्फ मामले को दबाने की कोशिश हुई, बल्कि आरोपी को बचाने के लिए पैसे के लेन-देन और उसके साथ पार्टी करने जैसे गंभीर आरोप भी लगे।
इसके अलावा, केस से जुड़ी गोपनीय जानकारी भी सुरक्षित नहीं रखी गई, जिससे पूरे मामले पर और संदेह गहरा गया।
पूरे थाना पर गिरी गाज, सभी कर्मी सस्पेंड
इन सभी तथ्यों के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पिण्ड्राजोरा थाना के सभी पुलिसकर्मियों आरक्षी से लेकर थाना प्रभारी तक, को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि मामले में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस की साख पर बड़ा सवाल
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां नई टीम ने तेजी से केस सुलझाया, वहीं शुरुआती जांच में हुई चूक ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। अब आगे की जांच और कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
